लंदन:
रिसर्चरों
का कहना है कि
ऐसी महिलाओं
को
पैंक्रियाज
ग्रंथि के
कैंसर होने की
70 फीसदी अधिक
संभावना होती
है जिनके पेट
के आसपास अधिक
चर्बी होती
है।
रिसर्च
के निष्कर्ष
कुछ ऐसे सबूत
मुहैया कराते
हैं जिनसे
मोटापा और
पैंक्रियाज
ग्रंथि के
कैंसर के बीच
संबंधों की
पुष्टि होती
है। ब्रिटिश
जर्नल ऑफ
कैंसर में छपी
स्वीडन के
केरोलिंसका
इंस्टिट्यूट
की जुहुआ लुओ
और उनके
साथियों की इस
रिपोर्ट में
कहा गया है कि
कैंसर का यह
खतरा पुरुषों
और महिलाओं
में समान रूप
से
है।
उन्होंने
एक बयान में
कहा कि हमने
पाया कि
रजोनिवृत्त
मोटी महिलाओं
में
पैंक्रिंयाज
ग्रंथि के
कैंसर का खतरा
तेजी से बढ़
रहा है जिनके
पेट के आसपास
अतिरिक्त
चर्बी होती
है। उन्होंने
कहा कि मोटापा
तेजी से बढ़
रही एक गंभीर
समस्या है
इसलिए
महिलाओं को
इसके खतरे से
सावधान रहने
की जरूरत
है।
लुओ और
उनके
सहयोगियों ने
अमेरिका में
पिछले 7 सालों
के दौरान की गई
स्टडी में एक
लाख 38 हजार से
अधिक
रजोनिवृत्त
महिलाओं पर यह
परीक्षण
किया।
उन्होंने
पाया कि 251
महिलाओं में
यह बीमारी
फैली जिसमें 78
के पेट पर काफी
मात्रा में
चर्बी थी।
रिसर्चरों के
मुताबिक,
स्टडी में यह
भी निष्कर्ष
निकला कि पेट
के आसपास अधिक
चर्बी होना
मोटापा मापने
के परंपरागत
तरीके के
अलावा इस
बीमारी का एक
बड़ा संकेत भी
है। उन्होंने
कहा कि मोटापा
से इंसुलिन का
स्तर
प्रभावित
होता है जिससे
पैंक्रियाज
कैंसर का खतरा
बढ़ता है और
डायबीटीज भी
इसमें अहम
भूमिका
निभाता है।
डायबीटीज के
लिए मोटापा भी
मुख्य वजह है।
कई स्टडी में
यह बात सामने
आई है कि
मोटापा की वजह
से ब्रेस्ट और
कोलोन समेत
विभिन्न
प्रकार के
कैंसर तथा दिल
से जुड़ी
बीमारियों का
खतरा बढ़ता
है।