आज
इंटरनेट का
क्रेज लोगों
के सिर चढ़कर
बोल रहा है।
नेट की
विभिन्न
साइट्स पर
जहां
इन्फरमेशन का
अनमोल खजाना
है, वहीं
अलग-अलग सोशल
नेटवर्किंग
साइट्स पर
जाकर लोग
चैटिंग और
ब्लॉगिंग भी
करते हैं।
लेकिन क्या
वर्चुअल लाइफ
लोगों की
सामाजिक
जिंदगी में
खलल डालती है
और उन्हें
दुनिया के
मेले में
अकेला छोड़
देती है। आइए,
देखते
हैं?
आईआईटी
मुंबई में
हॉस्टलों में
इंटरनेट पर
बैन लगा दिया
गया है।
अधिकारियों
का कहना है कि
इससे स्टूडंट
नेट सर्फिंग,
गेमिंग और
ब्लॉगिंग के
एडिक्ट बन
जाते हैं और
पढ़ाई में
उनकी
परफॉरमंस पर
बुरा असर
पड़ता है। नेट
पर ज्यादा समय
बिताने से
उन्हें
अकेलापन
ज्यादा रास
आने लगता है और
वह समाज से कट
जाते हैं। आज
कई लोगों के
लिए नेट पर
सर्फिंग और
चैटिंग,
जिंदगी
बिताने का एक
तरीका बन गया
है। लेकिन यह
भी सच है कि
वर्चुअल
वर्ल्ड तेज
रफ्तार से
दौड़ती
जिंदगी में
अपनी पहचान
बना चुका है और
कोई आदमी इसे
आसानी से
इग्नोर नहीं
कर
सकता।
आईटी
प्रफेशनल
अनुपमा
शेट्टी कहती
हैं, 'नेट के
जरिए आप मीलों
दूर बैठे अपने
फ्रेंड्स से
कॉन्टैक्ट तो
कर ही सकते
हैं, साथ ही यह
रोजाना की
जिंदगी का
जरूरी हिस्सा
भी बनता जा रहा
है। नेट को
पसंद करना या न
करना किसी
व्यक्ति की
पर्सनल सोच हो
सकती है।
हालांकि
वर्चुअल
वर्ल्ड से
जुड़े रहने से
आपकी लाइफ ईजी
हो जाती
है।'
कई लोग
यह भी सोचेंगे
कि नेट पर समय
बिताने से
सामाजिक
अलगाव की
थिअरी
तोड़-मरोड़ कर
बनाई गई है।
पार्श्व एस. का
कहना है,
'दफ्तर या अन्य
संस्थानों
में नेट पर समय
बिताने पर
पाबंदी लगाना
केवल उसी हालत
में जायज
ठहराया जा
सकता है, जब
उससे
प्रॉडक्टिवटी
और वर्क
क्वॉलिटी
प्रभावित
होती है। मैं
नहीं समझता कि
अपने
फ्रेंड्स से
ऑनलाइन
कॉन्टैक्ट
में रहने से
कोई व्यक्ति
इंट्रोवर्ट
हो जाता है।
हमें
टेक्नॉलजी और
रीयल
कम्यूनिकेशन
के फायदों को
पहचानकर
उसमें से
बेहतर का
चुनाव करना
चाहिए।'
आईआईएम
अहमदाबाद के
स्टूडंट
सुमित
अग्रवाल कहते
हैं, 'हम लोग
कैंपस में नेट
पर भी समय
बिताते हैं और
दोस्तों के
साथ मौज-मस्ती
भी करते हैं।
एक दूसरे को
कोई मेसिज
देने के
वर्चुअल
तरीके का कोई
जवाब नहीं है,
लेकिन इसके
साथ ही हम
कॉलेज में
एक्टिव सोशल
लाइफ भी
बिताते हैं।
यह कहना गलत है
कि नेट पर
साइट्स विजिट
करने से इंसान
में अकेलेपन
की भावना घर कर
जाती
है।'
इंडस्ट्रियलिस्ट
निर्मल कुमार
का मानना है,
'यह सच है कि
वर्चुअल
वर्ल्ड में
समय बिताने से
कॉन्टैक्ट
में पर्सनल टच
नहीं आ पाता,
पर आजकल हर कोई
घड़ी की
सुईयों से
दौड़ लगा रहा
है। आज लोगों
को किसी भी
मेसिज का जवाब
जल्द से जल्द
और डिलिवरी
समय से पहले
चाहिए। अगर आप
कोई मीटिंग
बुलाना चाहते
हैं तो आप अपने
सहयोगियों को
ई-मेल कर सकते
हैं। यह सबसे
फास्ट तो है
हीं, साथ ही
वक्त की जरूरत
बन चुका
है।'
मनोवैज्ञानिक
दर्शन शाह
मानते हैं,
'नेट को यूज
करने पर
निगरानी और
इसके लिए कुछ
घंटे निश्चित
किए जा सकते
हैं, लेकिन इसे
बिल्कुल बैन
नहीं किया जा
सकता। नेट से
लोगों में
अकेलेपन की
भावना आती है,
सिक्के का
सिर्फ एक पहलू
है। लेटेस्ट
टेक्नॉलजी का
फायदा उठाते
हुए नेट का
जरूरत के
अनुसार यूज
करना चाहिए।
बाकी हर चीज
इसके बाद आती
है।