अपनी
बेपनाह
खूबसूरती
के
लिए शिलॉन्ग
शहर को
'स्कॉटलैंड ऑफ
द ईस्ट' भी कहा
जाता है।
दरअसल, यह
रोमैंटिक हिल
सिटी अपने
नज़ारों में
स्कॉटलैंड से
बेहद मेल खाती
है। हालांकि
शुरुआत से यह
शहर ऐसा नहीं
था। 1864 तक
शिलॉन्ग एक
छोटा-सा गांव
था। इसके बाद
यह काफी सालों
तक ईस्टर्न
बंगाल और असम
की समर कैपिटल
रहा। साल 1897 में
आए भूकंप में
यह शहर पूरी
तरह नष्ट हो
गया था। इसके
बाद इसे
दोबारा बसाने
का काम चलता
रहा और जनवरी 1972
में इसे तब बने
नए राज्य
मेघालय की
राजधानी
घोषित किया
गया। शिलॉन्ग
राज्य के
पूर्वी
हिस्से में है
और समुद्र तल
से इसकी ऊंचाई
4,990 फीट
है।
वॉटर
फाल्स
-
क्रिनोलिन
फॉल्स तकरीबन
12-13 मीटर की
ऊंचाई वाले
हैं और इनके
बेस पर
स्विमिंग पूल
बना
है।
-
गुन्नर
फॉल्स 1 की
ऊंचाई 24-26 मीटर
है और
मिलिट्री
कैंप के पास
हैं।
-
गुन्नर
फॉल्स 2 हैपी
वैली से एक
किलोमीटर की
दूरी पर हैं।
यह जगह कुदरती
सौंदर्य से
भरी
है।
-
हैपी वैली से
पांच
किलोमीटर दूर
स्वीट फॉल्स
हैं, जो
शिलॉन्ग के
सबसे खूबसूरत
वॉटर फॉल है।
इनकी ऊंचाई 96
मीटर
है।
-
ऐलिफेंट गेट
और ऐलिफेंट
फॉल्स अपर
शिलॉन्ग के
पास है। बारिश
के मौसम में यह
जगह बेहद
रोमैंटिक व
खूबसूरत लगती
है। यह जगह
बतौर पिकनिक
स्पॉट भी बेहद
पॉपुलर है।
ऐलिफेंट
फॉल्स के पीछे
एलिसियम
फॉल्स भी देखे
जा सकते
हैं।
-
बीडन फॉल्स
बड़ा बाजार से
दो किलोमीटर
की दूरी पर
हैं। इसके बेस
पर
हाइड्रोइलैक्ट्रिक
पावर हाउस बना
है।
-
बीडन फाल्स
के पस ही बिशप
फाल्स हैं और
साथ में ये
उमियम नदी में
मिलते
हैं।
पीक्स
-
शिलॉन्ग पीक
यहां की सबसे
ऊंची पीक है।
इसकी ऊंचाई 1961
मीटर है और इसी
वजह से यह
हमेशा धुंध से
घिरी रहती है।
-
सोहनंग पीक 1343
मीटर ऊंची है
और कई
जनजातियां
इसमें अपार
श्रद्धा रखती
हैं।
-
दिनगी हिल्स
उमियम
स्ट्रीम के
पास है। यहां
पहुंचने के दो
रास्ते हैं।
एक सड़क से और
दूसरा
माउंटेन
क्लाइंबिंग
के जरिए। इस
दौरान भोई शहर
का खूबसूरत
नजारा देखा जा
सकता
है।
-
डंपीप पीक की
ऊंचाई 5100 फीट है
और यह इस एरिया
की सबसे ऊंची
पीक है। घास के
मैदान के बीच
में खड़ी यह
ऊंची पहाड़ी
वाकई मनमोहक
है।
लेक्स
-
वार्ड लेक
पर्यटकों के
बीच में खासी
पॉपुलर है।
हॉर्स-शू शेप
की यह
आर्टिफिशल
लेक गवर्नर
हाउस के पास है
और फिशिंग के
लिए बेस्ट जगह
है। यहां
बोटिंग भी
एंजॉय की जा
सकती
है।
-
शिलॉन्ग से 17
किलोमीटर की
दूरी पर उमियम
या बड़ापानी
लेक है, जो
हाइड्रोइलैक्ट्रिक
बांध की वजह से
अस्तित्व में
आई है। इसके
पास मेघालय
टूरिज़म
डिपार्टमेंट
की तरफ से एक
रिसॉर्ट बना
है और लेक में
वॉटर स्कीइंग,
वॉटर
साइकलिंग,
बोटिंग जैसे
तमाम वॉटर
स्पोर्ट्स का
रोमांच लिया
जा सकता
है।
अन्य
आकर्षण
-
मेघालय की
जनजातियों के
कल्चर को करीब
से समझने के
लिए स्टेट
सेंट्रल
लाइब्रेरी
कॉप्म्लैक्स
में बना स्टेट
म्यूज़ियम
देखें।
-
बटरफ्लाई
म्यूज़ियम
में तितलियों
की तमाम
प्रजातियां
देखी जा सकती
हैं।
-
वार्ड लेक के
पास बना
बॉटैनिकल
गार्डन आपको
इस एरिया के
पौधों की तमाम
प्रजातियां
दिखाएगा।
यहां
ऑर्किड्स की
बड़ी वैराइटी
है।
-
शिलॉन्ग का
गोल्फ कोर्स
एशिया का पहला
18 होल वाला
गोल्फ कोर्स
है। जाहिर है,
सैलानियों
में इसका खासा
आकर्षण
है।
-
डिपार्टमेंट
ऑफ
एग्रीकल्चर
की देखरेख में
चल रहा फ्रूट
गार्डन इस जगह
पर मिलने वाले
फलों की तमाम
वैराइटी का
स्वाद समेटे
है। यहां का
नैचरल
स्प्रिंग
वॉटर से
पेड़ों को
पानी देने और
मछलियों का
पालन करने का
काम साथ होता
है।
-
शिलॉन्ग का
सबसे खूबसूरत
चर्च
कैथेड्रल ऑफ
मैरी है। इसकी
पहाड़ी के ठीक
नीचे ग्रोटो
चर्च है।
स्टेट
सेंट्रल
लाइब्रेरी के
पास बना ऑल
सेंट्स चर्च
लकड़ी से बना
है और बेहद
दर्शनीय
है।
आसपास
-
शिलॉन्ग से 64
किलोमीटर की
दूरी पर सल्फर
वाले गर्म
पानी के चश्मे
की जगह जाकरम
है। इस पानी
में औषधीय
ताकत पाई जाती
है।
-
शिलॉन्ग से 96
किलोमीटर दूर
बॉर्डर शहर
दावकी है, जो
कल्चर वगैरह
में
बांग्लादेश
से बेहद मेल
खाता
है।
-
उमगोत नदी
में होने वाली
सालाना बोट
रेस भी इस
एरिया का एक
प्रमुख
आकर्षण
है।
कैसे
जाएं
शिलॉन्ग
तक पहुंचने के
लिए नज़दीकी
रेलवे स्टेशन
और एयरपोर्ट
गुवाहाटी है।
दोनों शहरों
के बीच का सड़क
मार्ग अच्छा
है।
टैक्सियां
जहां कम दामों
में मिल जाती
हैं, वहीं
गुवाहाटी के
लिए हर आधे
घंटे में बस
आसानी से मिल
जाती है।
गुवाहाटी से
इसकी दूरी 104
किलोमीटर
है।
कब
जाएं
शिलॉन्ग
में बारिश का
मौसम देखने
वाला होता है।
यहां मॉनसून
जून से शुरू
होकर अगस्त के
अंत तक रहता
है। गर्मियों
में यहां मौसम
गर्म और उमस
भरा होता है,
जबकि
सर्दियों में
यहां बहुत ठंड
पड़ती है।
अक्टूबर-नवंबर
और
मार्च-अप्रैल
यहां आने के
बेस्ट महीने
हैं।
शॉपिंग
शिलॉन्ग
के बड़े बाजार
से हाथ से बुनी
टोकरियां, हाथ
से बनी शॉलें,
दूसरे
हैंडीक्राफ्ट्स,
केन वर्क और
ऑरेंज फ्लॉवर
हनी खरीदें।
मेधा
चावला बतरा