एनबीटी
न्यूज
कानपुर:
राष्ट्रीय
वस्त्र निगम
ने यूपी में
अपनी कोई भी
मिल फिर से
शुरू नहीं
करने का फैसला
किया है। मऊ
स्थित एनटीसी
की मिल को अब
जॉइंट वेंचर
के तहत चलाई
जाएगी, बाकी 10
मिलें बंद कर
दी जाएंगी। इस
बारे में
बीआईएफआर को
एनटीसी ने
रिपोर्ट सौंप
दी है। इन
मिलों
मजदूरों और
कर्मचारियों
को अन्य
राज्यों में
चल रही एनटीसी
की मिलों में
समायोजित
किया
जाएगा।
उत्तर
प्रदेश में
एनटीसी की 11
मिलें है।
इनमें से 5
म्योर मिल,
विक्टोरिया
मिल, स्वदेशी
कॉटन मिल,
अर्थटन मिल और
लक्ष्मीरतन
कॉटन मिल
कानपुर में
हैं, बाकी 6
मिलें हाथरस,
रायबरेली, मऊ ,
लखनऊ ,
सहारनपुर और
नैनी में है।
फिलहाल मऊ को
छोड़कर किसी
भी मिल में
उत्पादन नहीं
हो रहा है।
अधिकांश
मजदूरों को
वीआरएस दिया
जा चुका
है।
चार साल
पहले एनटीसी
ने तय किया था
कि नैनी और मऊ
की मिलें चलाई
जाएंगी, लेकिन
अब उसने फैसला
किया है कि मऊ
की मिल को
छोड़कर यूपी
में एनटीसी की
सभी मिलों को
हमेशा के लिए
बंद कर दिया
जाए। इस फैसले
के बाद एनटीसी
के कानपुर
स्थित
मुख्यालय का
होल्डिंग
कंपनी में
विलय कर दिया
गया
है।
एनटीसी
प्रबंधन ने
बीआईएफआर को
भी इस संबंध
में रिपोर्ट
सौंप दी है। इस
रिपोर्ट में
कहा गया है कि
मऊ स्थित मिल
जॉइंट वेंचर
पर चलाई
जाएगी। वहां
उत्पादन हो
रहा है, बाकी
मिलों की
संपत्ति की
बिक्री की
प्रक्रिया भी
शुरू कर दी गई
है। मिलों और
मुख्यालय के 500
से अधिक
कर्मचारियों
और
अधिकारियों
को अन्य
राज्यों में
समायोजित
किया जाएगा।
कुछ
कर्मचारियों
का तबादला कर
दिया गया है।
इस फैसले से
कर्मचारियों
में नाराजगी
है।
एनटीसी
मिल्स स्टाफ
असोसिएशन ने
इस पर आपत्ति
जताई है। उसने
मांग की है कि
कंपनी अपनी
पूर्व घोषित
स्कीम लागू
करे।
महाराष्ट्र,
कर्नाटक और
राजस्थान की
तर्ज पर
कानपुर में भी
एक नई मिल
स्थापित की
जाए। इस मिल पर
करीब 70 करोड़
रुपए खर्च
होंगे।
कानपुर की
पांचों मिलों
की संपत्ति कम
से कम 800 करोड़
रुपये की है।
इसे बेचकर एक
नई मिल तो खड़ी
ही की जा सकती
है। वैसे
ग्रीन बैल्ट
योजना के तहत
शहर के बाहरी
इलाके में मिल
स्थापित की जा
सकती है।
असोसिएशन के
महामंत्री
राजेंद्र
त्रिवेदी ने
बताया कि इस
संबंध में
एनटीसी
चेयरमैन के
अलावा
बीआईएफआर से
भी गुहार की गई
है।