पुणेः
शिवसेना
प्रमुख बाल
ठाकरे ने
बीएसपी नेता
मायावती को
प्रधानमंत्री
पद के
उम्मीदवार के
तौर पर आगे
बढ़ाने के लिए
लेफ्ट की कड़ी
आलोचना की है।
ठाकरे ने
यूपीए को
विश्वास मत
में मिली जीत
को
'उद्योगपतियों
की धन शक्ति'
का नतीजा
बताया।
शिवसेना
के मुखपत्र
'सामना' में
बुधवार को छपे
संपादकीय में
ठाकरे ने
टिप्पणी की
'मनमोहन सिंह
की सरकार को
हटाने के जोश
में लेफ्ट ने
मायावती को
प्रधानमंत्री
पद के घोड़े पर
बिना यह जाने
बिठा दिया कि
यह 'घोड़ा'
'हॉर्स
ट्रेडिंग'
करने वालों से
भी ज्यादा
खतरनाक है।'
संपादकीय के
मुताबिक
'मायावती को
प्रधानमंत्री
पद का सपना
दिखाकर लेफ्ट
ऐतिहासिक भूल
कर रहा है।
कांग्रेस को
शिकस्त देने
की जरूरत है
लेकिन इसके
लिये बीएसपी
प्रमुख का
इस्तेमाल
करना ऐसी दवा
देने की तरह है
जो बीमारी से
भी ज्यादा
खतरनाक है।'
उन्होंने
आरोप लगाया कि
लेफ्ट को भारत
को 'चीन का
गुलाम' बनाने
में कोई ऐतराज
नहीं होगा,
लेकिन वह यह
बर्दाश्त
नहीं कर सकता
कि देश
अमेरिका का
दोस्त बन
जाए।
ठाकरे
ने आगे कहा है,
'लेकिन
राष्ट्रपति
बुश ने इराक
में जो किया
उसकी तुलना
में लेफ्ट ने
नंदीग्राम
में जो किया
उसकी निंदा
करने की
ज्यादा जरूरत
है।' उन्होंने
लिखा कि
विश्वास मत के
दौरान संसद
में जो हुआ वह
यह दर्शाता है
कि
सिद्धांतों
और नैतिकता की
बात करने
वालों सबसे
पहले बिके।
यूपीए का टिके
रहना
उद्योगपतियों
के धन और
असीमित शक्ति
का नतीजा है।
इसने भले ही
सरकार को बचा
लिया हो लेकिन
भारत के
संसदीय
लोकतंत्र की
प्रतिष्ठा को
धूमिल कर दिया
है। ठाकरे ने
कहा कि मनमोहन
सिंह एक भद्र
व्यक्ति हैं
जो
'दुर्योधनों'
से घिरे हुए
हैं।