लंदनः
एक रिपोर्ट के
मुताबिक,
ब्रिटेन में
सेवारत
डॉक्टरों के
लिए एक
महत्वपूर्ण
नियम लागू
होगा। इसके
तहत उन्हें अब
अनिवार्य रूप
से हर साल
एलिज़बिलटि
टेस्ट देना
होगा। इस नियम
के दायरे में
हजारों
पेशेवर
भारतीय
डॉक्टर भी
आएंगे।
ब्रिटेन
के चीफ मेडिकल
ऑफिसर लियाम
डोनाल्डसन
द्वारा तैयार
की गई 'मेडिकल
रिवैलिडेशन :
प्रिंसिपल्स
एंड नेक्स्ट
स्टेप'
रिपोर्ट में
बताया गया है
कि 1,50,000 से अधिक
डॉक्टरों को
सालाना
अनिवार्य
टेस्ट से
गुजरना होगा।
अच्छा काम
नहीं करने
वालों को
चुनकर बाहर
निकालने के
लिए सीनियर
डॉक्टरों की
नियुक्ति की
जाएगी।
रिपोर्ट
में यह भी कहा
गया है कि
फैमिली
डॉक्टर,
हॉस्पिटल
कंसलटेंट्स
और निजी
चिकित्सकों
को प्रत्येक 5
साल के बाद
अपने लाइसेंस
के नवीकरण के
लिए आवेदन
करना
होगा।
ब्रिटेन
में 150 सालों
में चिकित्सा
कानून में यह
सबसे बड़ा
सुधार है।
इसके तहत खराब
काम करने वाले
डॉक्टरों को
चुन कर बाहर
निकालने के
लिए निरीक्षक
रोगियों से
पूछी गई
प्रश्नावली
और उनके
सहकर्मियों
से ली गई
प्रतिक्रिया
को साक्ष्य के
तौर पर
इस्तेमाल
करेंगे।
'
द
टाइम्स' के
मुताबिक, जो
डॉक्टर अपने
कार्य में
अपेक्षा के
अनुरूप
उल्लेखनीय
सुधार नहीं कर
पाएगा, उसका
नाम मेडिकल
रजिस्टर से
हटा दिया
जाएगा। विश्व
में अपनी तरह
की यह पहली
प्रक्रिया
है। इसे उन
डॉक्टरों की
पहचान करने के
लिए तैयार
किया गया है जो
बार-बार गलत
चिकित्सीय
निर्णय लेते
हैं और अपने
काम में
आशानुरुप
सुधार नहीं
लाते
हैं।
रिपोर्ट
में कहा गया है
कि यह परीक्षण
दो साल के अंदर
शुरू हो
जाएगा।
विभिन्न
मेडिकल
कॉलेजों को यह
जांच करने के
लिए परीक्षण
विकसित करना
होगा कि
डॉक्टर नई
जानकारियों
से अवगत रहें।
'
द
टाइम्स' के
मुताबिक
रिपोर्ट में
कहा गया है कि
फिलहाल
डॉक्टरों को
जनरल
प्रैक्टिशनर
या मेडिकल
कंसलटेंट के
रूप में
स्वतंत्र
पेशे में
प्रवेश करने
के लिए उनके
योग्यता की
औपचारिक
समीक्षा नहीं
की जाती है।