काठमांडूः
नेपाली
राजमहल में
साल 2001 के
नरसंहार से
जुड़े विवाद
में एक नया
मोड़ आ गया है।
एक नेपाली
सैनिक का दावा
है कि वह
शुक्रवार रात
को हुई इस घटना
का
प्रत्यक्षदर्शी
है और इन
हत्याओं के
दोषी माने जा
रहे युवराज
दीपेंद्र
निर्दोष थे,
क्योंकि उसकी
अपने परिवार
के सदस्यों से
पहले ही हत्या
हो गई
थी।
लाल
बहादुर
लामतेरी ने
नेपाली दैनिक
नया पत्रिका
को बताया कि
तत्कालीन
नरेश
वीरेंद्र और
उनकी पत्नी
ऐश्वर्या की
रात्रि भोज
में गोली
मारकर की गई
हत्या से पहले
ही एक जून 2001 को
युवराज
दीपेंद्र को
मार दिया गया
था। अखबार ने
सरकारी जांच
आयोग की
रिपोर्ट पर भी
सवाल उठाए हैं,
जिसमें
दीपेंद्र को
हत्याओं का
दोषी ठहराया
गया है।
अधिकतर
नेपाली सरकार
के इस दावे पर
भरोसा नहीं
करते और उनका
मानना है कि
शाही परिवार
को समाप्त
करने के पीछे
कोई साजिश थी,
क्योंकि इस
दुखद घटना के
बाद नरेश
वीरेंद्र की
जगह उनके भाई
नरेश
ज्ञानेंद्र
राजगद्दी पर
आसीन हो गए।
नरसंहार के
समय
नारायणहिती
राजमहल में
तैनात सेना के
जूनियर कर्मी
लामतेरी ने
दावा किया कि
अपदस्थ किए गए
नरेश का पुत्र
और दीपेंद्र
का चचेरा भाई
पारस उस रात
राजमहल के
रात्रि भोज
में एक
व्यक्ति के
साथ आया था,
जिसने
दीपेंद्र से
मिलता-जुलता
मुखौटा पहन
रखा था। उसने
दैनिक को
बताया कि
मुखौटा पहने
व्यक्ति ने
शाही परिवार
के सदस्यों की
हत्या से पहले
दीपेंद्र को
मार दिया।
लामतेरी का
दावा है कि
उसने शाही
परिवार के
नरसंहार से
पहले
दीपेंद्र को
उसके निजी
कमरे में
गोलियों से
छलनी हालत में
देखा
था।
दीपेंद्र
की पीठ पर 6
गोलियां लगी
थीं और एक गोली
बाएं हाथ पर भी
थी। लामतेरी
के मुताबिक
उसने दूसरे
सिक्युरिटी
स्टाफ के साथ
मिलकर एक अनाम
चिट्ठी भी
भेजी थी,
जिसमें
दीपेंद्र को
दोषी बताया
गया था। पर
चिट्ठी भेजने
के 3 महीने बाद
ही उसका
डिमोशन करके
दूसरी
बटालियन में
ट्रांसफर कर
दिया गया। यही
नहीं एक
बिज़नसमैन के
मर्डर के झूठे
केस में उसे
जेल भी भेज
दिया गया।