सिंगापुरः
विश्वास
प्रस्ताव पर
यूपीए सरकार
की जीत के बाद
ऑस्ट्रेलिया
ने बुधवार को
संकेत दिए कि
वह एनएसजी
(न्यूक्लियर
सप्लायर्स
ग्रुप) में
भारत के पक्ष
का समर्थन
करेगा।
उल्लेखनीय
है कि नई
दिल्ली को
भारत-अमेरिका
परमाणु
समझौते के
सिलसिले में
अन्य देशों से
परमाणु
कारोबार के
लिए 45 सदस्यीय
एनएसजी से
मंजूरी लेनी
होगा। यहां
दक्षिण पूर्व
एशियाई देशों
के संगठन
आसियान के
मंत्रिस्तरीय
सम्मेलन के
मौके पर विदेश
राज्यमंत्री
आनंद शर्मा और
ऑस्ट्रेलियाई
विदेश मंत्री
स्टीफन स्मिथ
की मुलाकात
में इस मुद्दे
पर चर्चा हुई।
आधिकारिक
सूत्रों ने यह
जानकारी
दी।
सूत्रों
ने बताया कि
ऑस्ट्रेलिया
ने इस मुद्दे
पर सकारात्मक
समझ दिखाई और
माना कि
परमाणु
अप्रसार के
नजरिए से भारत
का अच्छा
रेकॉर्ड रहा
है। शर्मा ने
इसके अलावा
चीन के विदेश
मंत्री यांग
जायेची से भी
मुलाकात की।
समझा जाता है
कि इस दौरान
भारत-अमेरिका
परमाणु करार
पर भी चर्चा
हुई।
इस बीच
दस सदस्यीय
आसियान ने
भारत-अमेरिका
परमाणु
समझौते को
'बेहद
सकारात्मक
कदम' बताते हुए
उम्मीद जताई
कि दोनों देश
इस संधि को
जल्द ही पूरा
करने में
सक्षम होंगे।
आसियान-भारत
मंत्रिस्तरीय
बैठक के दौरान,
जिसमें आनंद
शर्मा ने भी
शिरकत की, इस
क्षेत्रीय
संगठन ने कहा
कि हम
भारत-अमेरिका
परमाणु
समझौते का
स्वागत करते
हैं जो भारत के
लिए ऊर्जा
सुरक्षा
सुनिश्चित
करेगा।
आसियान ने यह
भी कहा कि इस
समझौते से हर
किसी को फायदा
पहुंचेगा।
भारत
को यूरेनियम
बेचने की
वकालत
सिडनी
:
ऑस्ट्रेलिया
की विपक्षी
लिबरल पार्टी
ने भारत को
यूरेनियम
सप्लाई किए
जाने की
जोरदार वकालत
की है। पार्टी
ने मनमोहन
सिंह सरकार की
जीत पर खुशी भी
जताई। पार्टी
के विदेश
प्रभाग के
प्रवक्ता
एंड्रयू रॉब
ने कहा कि अब
वक्त आ गया है
कि केबिन रड
सरकार भारत को
यूरेनियम न
बेचने के
फैसले की
समीक्षा करे।
उल्लेखनीय है
कि अगस्त-2007 में
लिबरल पार्टी
की तत्कालीन
सरकार भारत को
यूरेनियम
निर्यात पर
रज़ामंद हो गई
थी। तब जॉन
हावर्ड
प्रधानमंत्री
थे। केविन रड
सत्ता में आए,
तो उन्होंने
पूर्ववर्ती
सरकार के
फैसले को पलट
दिया। रॉब ने
एक बयान में
कहा कि यह घातक
राजनीति है।
सरकार एटमी
मसले पर भारत
के खिलाफ सख्त
रवैया बनाए
नहीं रख सकती।
वैश्विक एटमी
बिरादरी में
भारत की साख
बढ़ रही है।