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'स्मार्ट' और सस्ता हुआ डीएल बनवाना
24 Jul 2008, 0009 hrs IST,नवभारत टाइम्स  
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नई दिल्लीः राजधानी में ड्राइविंग लाइसेंस भी अब स्मार्ट कार्ड आधारित बनाए जाएंगे। सरकारी हिस्सेदारी वाली कंपनी डिम्टस यह काम करेगी। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस निर्णय को लागू होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है।

हालांकि इस फैसले से अब दिल्ली के सभी 13 ट्रांसपोर्ट जोनल दफ्तरों में अत्याधुनिक ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम लगाने का रास्ता साफ हो गया है। इस फेरबदल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब लोगों को लाइसेंस बनवाने के लिए लगने वाली 90 रुपये की राशि नहीं देनी पड़ेगी। इस तरह से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कुल मिलाकर 280 रुपये ही लगेंगे। हालांकि डिम्टस एक सौ रुपये प्रति लाइसेंस वसूलेगी लेकिन यह राशि खुद ट्रांसपोर्ट विभाग अदा करेगा।

इस वक्त दिल्ली के जोनल दफ्तरों में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम एक प्राइवेट कंपनी करती है, लेकिन इस कंपनी की ओर से बनाए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस की क्वॉलिटी इतनी खराब है कि उस पर बनी आवेदक की फोटो को पहचानना मुश्किल हो जाता है। अभी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए फीस तो ट्रांसपोर्ट विभाग ही लेता है लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड की 90 रुपये फीस लेकर विभाग इसे प्राइवेट कंपनी के सुपुर्द कर देता है। मोटर वाहन कानून के तहत 90 रुपये की यह राशि ली ही नहीं जा सकती लेकिन अब तक विभाग यह राशि वसूलता रहा है लेकिन अब यह राशि नहीं वसूली जाएगी।

अब इस विभाग की जगह ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का कार्य डिम्टस करेगी। नए ड्राइविंग लाइसेंस पर कंप्यूटरीकृत फोटो, उंगलियों के निशान, आवेदक के हस्ताक्षर, और अन्य ब्यौरे होंगे। परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए डिम्टस को प्रति लाइसेंस एक सौ रुपये और सर्विस टैक्स लेगी। लेकिन यह सारी राशि ट्रांसपोर्ट विभाग ही देगा। इसी तरह से डिम्टस लर्निन्ग लाइसेंस के लिए भी फीस के अलावा 10 रुपये लेगी, जबकि ड्राइवर बैच के लिए यह शुल्क 45 रुपये और उस पर लगने वाला सर्विस टैक्स होगा। दिल्ली सरकार का कहना है कि अब तक जो कंपनी यह लाइसेंस बना रही थी, उसका कॉन्ट्रैक्ट 2003 में ही खत्म हो गया था।

लेकिन चूंकि अब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी थी, इसलिए इस कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट थोड़ी-थोड़ी अवधि के लिए बढ़ाया जा रहा था। दिल्ली सरकार का कहना है कि नए सिस्टम के तहत ड्राइविंग लाइसेंस का पूरा डेटा बेस तैयार होगा और यह हर जोनल दफ्तर में उपलब्ध होगा। इस तरह से कोई भी व्यक्ति एक ड्राइविंग लाइसेंस के होते हुए दूसरा लाइसेंस नहीं बनवा सकेगा। इसके अलावा नए सिस्टम में कंप्यूटर की तादाद चार गुना बढ़ा दी जाएगी, ताकि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में कम से कम वक्त लगे।

ट्रांसपोर्ट विभाग का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस को कोरियर से भेजा जाएगा। कोरियर का खर्च खुद परिवहन विभाग वहन करेगा। विभाग का तर्क है कि अभी कई लोग जाली दस्तावेजों से लाइसेंस बनवा लेते हैं। कोरियर के जरिए लाइसेंस भेजने से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए दिया गया पता सही है या नहीं। यही नहीं, इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार, दलाली पर भी रोक लगेगी।
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