आशीष
पांडे
नई
दिल्लीः
एक
करोड़ रुपये
की गड्डियों
ने एक अरब की
आबादी के
लोकतंत्र को
शर्मसार कर
दिया, लेकिन
सवाल है कि आगे
क्या होगा? उन
टेपों का क्या
होगा जो
स्पीकर को
सौंपे गए? उन
नोटों का क्या
होगा, जो
स्पीकर की मेज
के सामने रखे
गए? जांच कैसे
होगी और अगर
कोई घूस दी गई,
तो दोषियों पर
शिकंजा कौन
कसेगा? क्या
बीजेपी
सांसदों के
खिलाफ कुछ
कार्रवाई हो
सकती है?
इस
मामले का
स्टिंग
ऑपरेशन करने
वाले चैनल
सीएनएन-आईबीएन
के
एडिटर-इन-चीफ
राजदीप
सरदेसाई ने
हमें बताया कि
बुधवार को
पांच टेप
स्पीकर को दिए
गए, जिनके साथ
चिट्ठी भी है।
उनके मुताबिक
यह केस गंभीर
है इसलिए हम
पूरी पुष्टि
के बिना
प्रसारित
नहीं कर सकते।
स्टिंग चैनल
की स्पेशल
इनवेस्टिगेशन
टीम के स्पेशल
कॉरेसपॉन्डेंट
सिद्धार्थ
गौतम ने किया
था। गौतम कहते
हैं कि जांच
में स्पीकर
मुझे बुलाते
हैं, तो मैं
सारी जानकारी
दूंगा।
स्टिंग का
प्रसारण होगा
या नहीं, यह
चैनल
मैनिजमंट पर
निर्भर है।
सूत्रों के
मुताबिक
बीजेपी के
बड़े नेताओं
ने गौतम से
संपर्क साधा
और सोमवार रात
से स्टिंग
शुरू हुआ।
सूत्र कहते
हैं कि रात
करीब 12:30 बजे
4-फिरोजशाह रोड
पर एसपी के एक
बड़े नेता को
भी टेप पर कैद
किया गया और
अगले दिन कैश
देने की घटना
रिकॉर्ड हुई।
अगर यह सच है
तो इसके
प्रसारण का
फैसला स्पीकर
की इजाजत के
बाद ही हो
पाएगा।
दिल्ली
पुलिस का कहना
है कि वह अभी
तक इस मामले
में कहीं नहीं
है। यानी एक
करोड़ के वे
नोट अभी
लोकसभा की
कस्टडी में ही
हैं। आगे की
जांच स्पीकर
को तय करनी है।
संविधान
विशेषज्ञ
सुभाष कश्यप
के मुताबिक
स्पीकर पर
निर्भर करता
है कि वह जांच
कैसे और कब
कराते हैं। वे
चाहें तो
संसदीय कमिटी
बनाकर या खुद
या पुलिस से
पड़ताल करा
सकते हैं।
सीबीआई के
पूर्व निदेशक
जोगिंदर सिंह
का कहना है
नोटों पर
उंगलियों के
निशान समेत कई
पुख्ता सबूत
होंगे।
सवाल
यह भी है कि
घूस दी गई, तो
देने वालों का
क्या होगा?
जोगिंदर सिंह
कहते हैं कि
नोट किस बैंक
से निकाले गए
ये आसानी से
पता चल सकता
है। लेकिन सब
कुछ
इच्छाशक्ति
पर है। सिंह
कहते हैं कि
बेहतर होगा
नोटों की जांच
सीबीआई या
लोकल पुलिस से
कराई जाए जबकि
मामले की पूरी
सच्चाई का पता
संसदीय कमिटी
लगाए।
एसपी
ने बीजेपी
सांसदों के
खिलाफ
कार्रवाई की
मांग की है,
लेकिन
संविधान
विशेषज्ञों
के मुताबिक
इसमें बहुत दम
नहीं है।
पूर्व अडिशनल
सॉलिसिटर
जनरल राजू
रामचंद्रन
कहते हैं कि
सांसदों के
पास अगर सदन
में अपनी
आवाज़ उठाने
का हक है, तो
उनके पास अपनी
बात के पक्ष
में सबूत रखने
का भी हक है।
रामचंद्रन
कहते हैं कि इस
बात में भी दम
नहीं है कि
सांसदों को ये
नोट स्पीकर के
कमरे में ले
जाने चाहिए
थे।