कोलंबो
:
कैप्टन
महेला
जयवर्द्धने,
मलिंडा
वर्णपुरा और
तिलन समरवीरा
की
सेंचुरियों
के अलावा 3 कैच
छूटने का पूरा
फायदा उठाते
हुए श्रीलंका
ने पहले टेस्ट
में अपनी पकड़
मजबूत कर ली।
जयवर्द्धने (136)
ने
बल्लेबाजों
की मददगार
सिंहलीज
स्पोर्ट्स
क्लब की पिच का
भरपूर फायदा
उठाते हुए
करियर का 23वां
टेस्ट
सेंचुरी पूरा
किया, जबकि
वर्णपुरा (115) ने
दूसरी
सेंचुरी
बनाई। इससे
दूसरे दिन का
खेल खत्म होने
तक श्रीलंका
ने चार विकेट
पर 422 रन बनाकर
अपनी स्थिति
मजबूत कर
ली।
दाएं
हाथ के
बल्लेबाज
समरवीरा
(नॉटआउट 111) ने
आखिरी सेशन
में करियर की
सातवीं
सेंचुरी जड़
मेहमान टीम के
लिए दिन को
बुरे सपने में
बदल दिया।
जयवर्द्धने
ने एसएससी में
अपनी नौवीं
सेंचुरी पूरी
की और सर डॉन
ब्रैडमैन के
बाद वह दूसरे
बल्लेबाज हैं,
जिन्होंने एक
ही टेस्ट स्थल
पर 9 सेंचुरीज़
लगाई हैं।
ऑस्ट्रेलियाई
दिग्गज ने
मेलबर्न
क्रिकेट
ग्राउंड पर नौ
सेंचुरीज़
बनाई थीं।
स्टंप्स के
समय समरवीरा
के साथ
तिलकरत्ने
दिलशान (20)
क्रीज पर थे।
लेकिन यदि
भारतीय
फील्डर मिले
इन तीनों
मौकों को
भुनाने में
सफल रहते, तो
फिर कहानी कुछ
दूसरी होती,
जिसमें दो बार
तो
जयवर्द्धने
को जीवनदान
मिला।
श्रीलंका
के खिलाफ
मौजूदा टेस्ट
सीरीज़ से नाम
वापस लेने
वाले महेंद्र
सिंह धोनी की
जगह
विकेटकीपिंग
कर रहे दिनेश
कार्तिक ने
जयवर्द्धने
को 2 कैच छोड़े,
जबकि गौतम
गंभीर ने
फॉरवर्ड
शॉर्ट लेग पर
यह गलती की।
गेंदबाजों को
कम मदद दे रही
पिच पर विकेट
के लिए
भारतीयों को
काफी पसीना
बहाना पड़ा और
उनके लिए यह
दिन हताशा
वाला रहा।
हालांकि
दूसरी नई गेंद
लेने के बाद
थोड़े समय के
लिए मिली मदद
का फायदा
उठाने से
फील्डर चूक
गए। भारतीय
गेंदबाजों को
खेलने में
मेजबान
बल्लेबाजों
को कोई
परेशानी नहीं
हुई और वे दिन
की शुरुआत से
ही तेजी से
खेलते रहे।
श्रीलंका के
बड़े स्कोर की
नींव रखने से
भारत को तीनों
दिन मैच में
बनाए रखने का
दबाव
बल्लेबाजों
पर आ गया
है।
गुरुवार
को दो विकेट पर
85 से आगे खेलने
उतरे
श्रीलंका को
वर्णपुरा और
जयवर्धने ने
जल्द कोई झटका
नहीं लगने
दिया। दोनों
ने तीसरे
विकेट के लिए 155
रन की
साझेदारी की।
ऑफ स्पिनर
हरभजन सिंह ने
वर्णपुरा को
आउट कर भारत को
पहली सफलता
दिलाई, जबकि
इशांत शर्मा
ने खतरनाक
जयवर्धने को
दिन के आखिर
में चलता
किया। साफ
मौसम के दौरान
वर्णपुरा और
उनके कैप्टन
ने बिना किसी
परेशानी के
अपने पहले दिन
की साझेदारी
में 150 मिनट में 120
रन जोड़े।
इशांत शर्मा
की गेंद पर
चौका लगाकर
सेंचुरी पूरी
करने वाले
वर्णपुरा का
दर्शकों ने
जमकर तालियां
बजाकर
अभिवादन किया
और उन्होंने 163
गेंदों में 13
चौके लगाए।
वर्णपुरा
जब 55 रन पर थे, तब
ज़हीर खान ने
अपनी गेंद पर
उनका कैच लिया
था लेकिन यह नो
बॉल थी। पहले
सेशन में
भारतीय
कैप्टन अनिल
कुंबले ने
रेफरल
प्रणाली का
उपयोग भी
किया।
उन्होंने
हरभजन की
वर्णपुरा के
खिलाफ
एलबीडब्ल्यू
की अपील पर
अंपायर मार्क
बेंसन के
फैसले को
चुनौती दी। तब
वर्णपुरा 86 रन
पर खेल रहे थे।
तीसरे अंपायर
ने जब मैदानी
अंपायर के
फैसले को सही
करार दिया तो
कुंबले भी
मुस्कराने
लगे। शाम को
श्रीलंकाई
बल्लेबाज
तिलकरत्ने
दिलशान ने
रेफरल
प्रणाली का
फायदा उठाया।
अंपायर बेंसन
ने दिलशान को
जहीर की गेंद
पर विकेटकीपर
के हाथों कैच
आउट दे दिया था
लेकिन तीसरे
अंपायर ने
उनका यह फैसला
नकार
दिया।
इससे
पहले
जयवर्द्धने
ने धीरे-धीरे
अपनी पारी आगे
बढ़ाई। जब वह 55
रन पर थे, तब
कार्तिक ने
उनका आसान कैच
छोड़ा।
भारतीय
विकेटकीपर के
लिए दिन अच्छा
नहीं था और
उन्होंने फिर
से श्रीलंकाई
कैप्टन को
जीवनदान दिया
जब वह 93 रन पर
थे। दोनों बार
गेंदबाज अनिल
कुंबले थे।
जयवर्धने की
पारी का अंत
इशांत की
खूबसूरत आउट
स्विंगर ने
किया और इस बार
कार्तिक ने
कैच लेने में
गलती नहीं की।
जयवर्द्धने
ने 259 गेंद की
अपनी पारी में
दस चौके और एक
छक्का
लगाया।