विशेष
संवाददाता
नई
दिल्लीः
आम
आदमी के साथ
यूपीए सरकार
के लिए भी राहत
भरी खबर है।
महंगाई दर
लगातार दूसरे
सप्ताह कम
हुई। 23 अगस्त
को समाप्त
सप्ताह में यह
12.34 फीसदी पर आ
गई। इस बार
गिरावट 0.06
फीसदी की रही।
वित्त
मंत्रालय इस
गिरावट से
काफी खुश
है।
बाजार
विशेषज्ञों
का कहना है कि
महंगाई की दर
में गिरावट
बेशक कम है, पर
अहम बात यह है
कि लगातार
दूसरे हफ्ते
इसमें गिरावट
रही। पूर्व
वित्त सचिव एस.
नारायणन ने
कहा कि
अंतरराष्ट्रीय
अर्थव्यवस्था
जिन हालात में
है, उसे देखते
हुए यह गिरावट
काफी मायने
रखती है।
संभावना है कि
महंगाई दर में
और कमी लाने के
लिए सरकार और
आरबीआई कुछ और
उपाय
करें।
इधर
मूल्यों पर
नजर रखने के
लिए बनी
कैबिनेट
कमिटी (सीसीपी)
ने और उपाय
करने पर
बातचीत की।
सूत्रों के
अनुसार यूपीए
सरकार चाहती
है कि
अंतरराष्ट्रीय
बाजार में
कच्चे तेल की
कीमतों में आई
गिरावट का
पॉजिटिव असर
रिटेल बाजार
पर पड़े और
कीमतों में
जल्द कमी आएं।
प्रधानमंत्री
डॉ. मनमोहन
सिंह की
अध्यक्षता
में हुई बैठक
में सभी की राय
थी कि इस वक्त
वस्तुओं की
सप्लाई
बढ़ाने पर जोर
दिया जाए।
सरप्लस मनी को
निकालने के
लिए अगर ब्याज
दरों में और
इजाफा करने की
ज़रूरत पड़े
तो सरकार को
कदम उठाना
चाहिए।
कैबिनेट
मंत्रियों का
कहना था कि अगर
महंगाई की दर
को दिसंबर तक 10
फीसदी पर लाने
में कामयाबी
मिली तो मार्च
2009 तक इसे 7 से 9
फीसदी लाने
में ज्यादा
मशक्कत नहीं
करनी
पड़ेगी।
प्रधानमंत्री
ने विशेष तौर
पर कृषि
मंत्री शरद
पवार से कहा कि
उनका
मंत्रालय पता
लगाए कि बिहार
और यूपी के कई
शहरों में
बाढ़ से गन्ना,
मक्का और अन्य
आवश्यक
वस्तुओं के
उत्पादन पर
क्या प्रभाव
पड़ेगा।
मंत्रालय यह
पता लगाए कि
इससे
खाद्यान्न,
खाद्य तेलों
और अन्य
वस्तुओं के
उत्पादन और
सप्लाई पर
क्या
पड़ेगा।
प्रधानमंत्री
ने सभी
मंत्रालयों
से कहा कि वे
महंगाई पर
सचिव स्तर पर
नियमित
बैठकें करते
रहें। इन
बैठकों में
बाजार और
महंगाई को
लेकर समीक्षा
होती रहनी
चाहिए। बैठक
में वित्त
मंत्री पी.
चिदंबरम ने
उम्मीद जताई
कि महंगाई को
कम करने के लिए
सरकार ने जो
लक्ष्य तय
किया है, उसको
हासिल कर लिया
जाएगा। बैठक
में जानकारी
दी गई कि
सितंबर महीने
में खुले
बाजार में 20
लाख टन चीनी का
स्टॉक उपलब्ध
होगा।