विशेष
संवाददाता
नई
दिल्लीः
यूपी में
कांग्रेस और
एसपी के बीच
सीटों का
बंटवारा
मुश्किल भंवर
में फंस गया
है। सोमवार को
दूसरे दौर की
बातचीत में
एसपी,
कांग्रेस को
डेढ़ दर्जन
सीटें देने को
भी तैयार नहीं
थी। एसपी के
अड़ियल रुख के
बाद कांग्रेस
ने उन 10 सीटों
पर दोस्ताना
मुकाबले का
प्रस्ताव रखा
जिनपर विवाद
है, मगर एसपी
का कहना था कि
दोस्ताना
मुकाबला कुछ
नहीं होता है।
या तो समझौता
होगा या नहीं
होगा।
न्यूक्लियर
डील पर केंद्र
सरकार के आगे
बढ़ते कदमों
का सारा श्रेय
एसपी ले रही
है। एसपी का
कहना है कि
सरकार को दिए
हमारे समर्थन
की वजह से ही
डील मुकाम तक
पहुंच रही है।
कांग्रेस ने
भी सोमवार को
अपनी नियमित
प्रेस
कॉन्फ्रेंस
में मुलायम
सिंह यादव और
अमर सिंह को
खास तौर पर
धन्यवाद
दिया। एसपी के
हौसले इन
दिनों बुलंदी
पर हैं। उसका
यहां तक कहना
है कि अगर
कांग्रेस
यूपी में 12
सीटों से
ज्यादा पर
अड़ी तो फिर
एसपी
रायबरेली में
सोनिया गांधी
और अमेठी में
राहुल की
सीटें छोड़कर
बाकी सब पर
चुनाव
लड़ेगी।
बातचीत में
कांग्रेस की
तरफ से
कांग्रेस
महासचिव
राहुल गांधी,
दिग्विजय
सिंह और यूपी
कांग्रेस की
प्रदेश
अध्यक्ष रीता
बहुगुणा और
एसपी की तरफ से
अमर सिंह और
रामगोपाल
यादव शामिल
हुए।
दिग्विजय ने
कहा कि करीब 72
सीटों पर
सहमति बन गई
है। बाकी
सीटों पर
दोस्ताना
मुकाबला
होगा। इस पर
एसपी के
महासचिव अमर
सिंह का कहना
है कि या तो
दोस्ती होती
या फिर
मुकाबला।
दोनों संभव
नहीं हैं।
इसके अलावा
एसपी यूपी के
बाहर भी
गठबंधन पर जोर
दे रही है।
एसपी दरअसल
यूपी में
बिहार
फॉर्म्युला
अपनाने की
मांग कर रही
है। जहां
कांग्रेस ने
आरजेडी के लिए
अधिकांश
सीटें छोड़ दी
थीं, मगर
कांग्रेस का
कहना है कि
राहुल यूपी
में वापसी के
लिए कड़ी
मेहनत कर रहे
हैं। यूपी में
कांग्रेस कुछ
हिस्सों में
सिमटने को
तैयार नहीं
है। पिछले
लोकसभा चुनाव
में यूपी की 80
सीटों में से
एसपी को 39 और
कांग्रेस को 9
सीटें मिली
थीं।