अनुराग
जैन
,
फरीदाबाद
मैंने
अपनी
कार
पर
ओ
.
डी
.
लिमिट
ली
थी। दो
साल
यूज़
करने
के
बाद
मेरी
तमन्ना
उसे
बंद
करने
की
हुई।
मैंने
इसके
लिए
बैंक
की
ब्रांच
से
संपर्क
किया
,
तो
हर
ब्रांच
मे
सर्विस
देने
वालों
का
अब
खेल
शुरू
हो
गया।
दो
साल
के
बाद
भी
ख़ाता
बंद
करके
मेरे
कागज
नहीं
दिए
हैं।
जबकि
खाते
के
दौरान
या
बाद
में
कभी
भी
मैं
डिफॉल्टर
नहीं
रहा।