नई
दिल्लीः
भारतीय हॉकी
टीम के
प्रभारी कोच
हरेंद्र सिंह
का टारगेट 2010
में भारत में
होने वाले
कॉमनवेल्थ
गेम्स और
वर्ल्ड कप में
टीम को फाइनल
तक ले जाना है।
लिहाजा
उन्हें
विदेशी कोच के
साथ काम करने
से भी गुरेज
नहीं है।
हरेंद्र ने
चंडीगढ़ से
दिए इंटरव्यू
में कहा, 'मुझे
विदेशी कोच के
साथ काम करने
में कोई
परेशानी नहीं
है। भारतीय
हॉकी की
बेहतरी के लिए
मैं हर भूमिका
निभाने को
तैयार हूं।
मेरा काम
मैदान पर है और
उसके बाहर की
राजनीति से
मेरा कोई
सरोकार नहीं
है।'
देश में
हॉकी के
संचालन के लिए
इंडियन
ओलिंपिक
असोसिएशन की
एडहॉक कमिटी
ने पिछले
हफ्ते
हरेंद्र को
सीनियर पुरुष
टीम का
प्रभारी कोच
बनाया है।
मुख्य कोच के
लिए विदेशी
नामों पर
विचार किया
जाएगा और उसकी
नियुक्ति तक
हरेंद्र ही यह
काम
संभालेंगे।
बाद में वह
सहायक कोच का
दायित्व
निभाएंगे और
यह नियुक्ति 2010
तक के लिए की
गई है।
अस्थायी
प्रभार का
प्रदर्शन पर
असर पड़ने के
बारे में पूछे
गए सवाल पर
उन्होंने कहा,
'मुझे तो पहली
बार इतना लंबा
समय दिया गया
है। मेरे लिए 2010
तक का समय
पर्याप्त है।
उसी साल भारत
की मेजबानी
में
कॉमनवेल्थ
गेम्स, र्वल्ड
कप और चीन में
एशियाड होने
हैं। मेरा
लक्ष्य पहले
दो
टूर्नामेंट
में टीम को कम
से कम फाइनल तक
ले जाना और
एशियाड का
गोल्ड मेडल
जीतना
है।'
हरेंद्र
ने कहा कि वह
वैज्ञानिक
तरीके से
कोचिंग में
विश्वास करते
हैं और इसके
लिए अतिरिक्त
सहयोगी स्टाफ
की नियुक्ति
की जाएगी,
जिसमें
विदेशी भी
शामिल हो सकते
हैं।
उन्होंने कहा,
'टीम के लिए
फिजियोलॉजिस्ट,
फिजियोथेरेपिस्ट,
फिजियो
विश्लेषक और
मालिशिए की
नियुक्ति की
जाएगी। इसमें
भी विदेशी
विशेषज्ञों
की नियुक्ति
की भी संभावना
है।'
हरेंद्र ने
बताया कि हॉकी
के लिए गठित
नियोजन समिति
के अध्यक्ष
पूर्व
ओलंपियन
जगबीर सिंह को
यह काम सौंपा
गया है, जो
दिसंबर तक
सहयोगी स्टाफ
का चयन कर
लेंगे।
उन्होंने कहा,
'मेरा जोर
शारीरिक
फिटनेस पर
रहेगा और इसके
लिए
वैज्ञानिक
तरीका अपनाया
जाएगा ताकि हम
विदेशी टॉप
टीमों के
समकक्ष आ
सकें। इसके
बाद शैली पर
मेहनत की
जाएगी।'
हरेंद
ने यह भी कहा
कि उनकी
प्राथमिकता
संभावित
खिलाड़ियों
के लिए
दोस्ताना
मैचों का
आयोजन कराना
भी है, क्योंकि
भारतीय टीम ने
पिछले छह
महीने से
इंटरनैशनल
हॉकी नहीं
खेली है और उसे
मैच अभ्यास की
सख्त जरूरत
है।
उन्होंने
यह भी कहा कि
खिलाड़ियों
का मनोबल
बढ़ाना बेहद
जरूरी है और
इसके लिए
प्रत्येक से
व्यक्तिगत
स्तर पर बात की
जाएगी।
उन्होंने कहा,
'मैं अगले
महीने से शुरू
हो रहे शिविर
के दौरान हर
खिलाड़ी को एक
लक्ष्य दूंगा
और सभी को साफ
कह दूंगा कि
उनसे क्या
अपेक्षाएं
हैं। इससे
खिलाडि़यों
के लिए भी काम
आसान हो जाएगा
और वे अपने खेल
का मजा ले
सकेंगे।
लगातार
नाकामी से
आजिज आ चुके इन
खिलाड़ियों
को अहसास
दिलाना होगा
कि वे ही
सर्वश्रेष्ठ
हैं और किसी भी
टीम को हरा
सकते हैं। यह
जज्बा भरना इस
समय किसी भी
कोच के लिए
सर्वोच्च
प्राथमिकता
होगी।'