ईश्वर को मानें तो कुछ भी गलत नहीं हो सकता: चेतन भगत-धर्म और मैं-धर्म-दर्शन-Navbharat Times
 
ईश्वर को मानें तो कुछ भी गलत नहीं हो सकता: चेतन भगत
8 Oct 2008, 1153 hrs IST,टाइम्स ऑफ इंडिया  
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चेतन भगत

मैं धार्मिक की बजाय आध्यात्मिक व्यक्ति ज्यादा हूं। मेरे लिए ईश्वर अपने अंदर की आवाज है - वह पराशक्ति जिसके प्रति हमें नतमस्तक होना चाहिए। ईश्वर की राम या सीता के रूप में या मंदिरों में पारंपरिक व्याख्या भी जरूरी है पर मेरे लिए आध्यात्मिक होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि यदि आप आध्यात्मिक नहीं हैं तो आप ईश्वर और धर्म के बारे में हर चीज को परंपराओं और अंधविश्वासों में परिवर्तित कर देते हैं।

मैं ईश्वर की रोज प्रार्थना करता हूं पर मैं किसी भी तरह से परंपरावादी नहीं हूं। मैं किसी खास मंत्र का उच्चारण नहीं करता , न ही किसी खास तरह से प्रार्थना करता हूं। मैं तो ईश्वर से सिर्फ बातें करता हूं , वैसे ही जैसे किसी मित्र से! मैं उसे अपने दिन भर की बातें बताता हूं और धन्यवाद देता हूं उस सबके लिए जो उसने मुझे दिया है।

मैं किसी चीज को सौभाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली नहीं मानता , न ही कोई ताबीज पहनता हूं। मैं इन सबसे दूर ही रहता हूं क्योंकि जैसे ही आप इस सबमें भरोसा करने लगते हैं , आप एक तरह से उन्हीं पर निर्भर हो जाते हैं और यह आपके लिए ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर जैसा हो जाता है।

मेरा भरोसा है कि मेरे जीवन में जो कुछ भी हुआ वह सब ईश्वर की कृपा है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी पहली ही किताब इतनी सफल होगी और मैं अपने अंतरतम में जानता हूं कि ईश्वर की इच्छा के बिना वह अब तक की बेस्टसेलर नहीं हो सकती थी।

मेरी दूसरी किताब ईश्वर के एक फोन कॉल के साथ शुरू होती है। यह अपने पाठकों को यह बताने का मेरा तरीका है कि वे अपने अंदर की आवाज सुनें , जो मेरे अनुसार ईश्वर है। मेरा भरोसा है कि जिंदगी में कुछ भी गलत नहीं हो सकता यदि आप अपने इंस्टिंक्ट्स को मानें और अंतिम , सार्वभौम पराशक्ति पर भरोसा रखें।

वैसे भी जब जीवन में कुछ गलत होने लगे तो ईश्वर में भरोसा खोना नहीं चाहिए। मैं संकट से बाहर निकलने के लिए स्व-विवेचना (सेल्फ टॉक) करता हूं , मंदिर जाना भी मदद करता है पर भविष्य के बारे में भूलकर वर्तमान में जीना मेरे लिए सबसे मददगार साबित होता है।

मेरा मानना है कि हमें जीवन को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। मैं कोई गंभीर व्यक्ति नहीं हूं पर मैं जो कुछ भी करता हूं पूरी तन्मयता (सिंसियरिटी) से करता हूं। सिंसियरिटी हमेशा फलदायक होती है। मैं अपने बेटों से भी कहता हूं कि स्वयं पर और ईश्वर पर भरोसा रखें।

ईश्वर पर भरोसा आपको अभिमानरहित , विनीत बनाए रखता है और विपरीत परिस्थितियों में भी आपको आधार दिए रहता है। अगर आप जीवन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं तो आपको ईश्वर और उसकी इच्छा पर भरोसा होना चाहिए। ईश्वर में भरोसा आपकी मदद ही करता है , कभी चोट नहीं पहुंचाता।
अंग्रेज़ी से अनुवाद : नीला प्रसाद

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