इकॉनमी में टर्निन्ग पॉइंट साबित होगी डील-ऐटमी डील-Navbharat Times
 
इकॉनमी में टर्निन्ग पॉइंट साबित होगी डील
3 Oct 2008, 0000 hrs IST,नवभारत टाइम्स  
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जोसफ बर्नाड
नई दिल्लीः सेनेट से ऐटमी डील पारित होने का देश के कॉर्परट जगत ने जोरदार स्वागत किया है। कॉर्परट दिग्गजों का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था में यह डील टर्निन्ग पॉइंट साबित होगी। इस ऐतिहासिक दिन का हम कई सालों से इंतजार कर रहे थे। अब इनवेस्टमंट और कारोबार के नए रास्ते खुलेंगे। भारत को उच्च तकनीक मिलेगी। पावर प्रॉडक्शन की क्षमता बढ़ेगी और न्यूक्लिअर इक्विपमंट सेक्टर में विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर भारतीय कंपनियां साझा कंपनियों का निर्माण कर सकेंगी। अहम बात कि ग्रोथ रेट बढ़ेगी और साथ में नौकरियां भी।

एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल का कहना है कि यह दौर आर्थिक सेक्टर में आगे बढ़ने का है। हमें नई सोच के साथ बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और विदेशी मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसी सोच का परिचय दिया है। आखिर उनकी मेहनत रंग लाई और डील पास हो गई। भारत के लिए विकास का नया रास्ता खुला है। कॉर्परट सेक्टर इस रास्ते में सरकार के साथ चलने को तैयार हैं।

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष डॉ. एल. के. मल्होत्रा के अनुसार, परमाणु डील होने से न्यूक्लिअर रिएक्टर लगेंगे। एक प्लांट को चलाने में 35 हजार लोगों की जरूरत होती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। जो लोग इसका विरोध कर रहे थे, उनको धीरे-धीरे समझ आ जाएगा कि यह डील देश के लिए कितनी लाभदायक है।

फिक्की के महासचिव अमित मित्रा कहते हैं कि हमारे पास जितने भी न्यूक्लिअर रिएक्टर हैं, उसमें से अधिकांश अपनी क्षमता से आधी पर काम रहे हैं। हमारे पास उनके लिए फ्यूल नहीं है। डील के बाद न सिर्फ अमेरिका बल्कि फ्रांस, रूस और ऑस्ट्रेलिया से भी भारत न्यूक्लिअर फ्यूल खरीद सकेगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह डील भारत के लिए कितनी लाभदायक साबित होगी।

फियो के अध्यक्ष गणेश गुप्ता मानते हैं कि इससे भारत का एक्सपोर्ट बढ़ना तय है। न्यूक्लिअर रिएक्टर को भरपूर फ्यूल मिलेगा, तो हमारी न्यूक्लिअर एनर्जी का उत्पादन भी दोगुना हो जाएगा और हम इसका निर्यात भी कर सकेंगे।

सीआईआई के महासचिव चंदजीत बनर्जी के अनुसार, अमेरिका के साथ डील से भारत करीब 63,000 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता विकसित कर सकेगा। बिजली उत्पादन की लागत जितना मौजूदा समय में है, उससे काफी कम हो जाएगी। इसका लाभ देश, आम आदमी और कॉर्परट जगत को मिलेगा।
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