नई
दिल्लीः
भारत ने
शुक्रवार को
कहा कि हम ऐटमी
टेस्ट पर अपनी
मर्जी से लगाई
गई एकतरफा रोक
का पालन करते
रहेंगे।
लेकिन इस रोक
को किसी संधि
के तहत
प्रतिबद्धता
में नहीं
ढालेंगे।
एक
चैनल से
बातचीत में
विदेश मंत्री
प्रणब
मुखर्जी से जब
भारत-अमेरिका
ऐटमी समझौते
पर दस्तखत के
बाद
न्यूक्लियर
टेस्ट के
अधिकार के
बारे में पूछा
गया तो
उन्होंने कहा
कि भारत के पास
टेस्ट करने का
अधिकार है,
जबकि अन्य के
पास
प्रतिक्रिया
व्यक्त करने
का।
प्रणब
ने कहा कि भारत
ने 1998 में
राजस्थान के
पोखरण में
ऐटमी टेस्ट के
बाद भविष्य
में ऐसे
टेस्टों पर
स्वैच्छिक
रोक का ऐलान
किया था। हम
इसका पालन
करेंगे।
हालांकि
उन्होंने साफ
किया कि भारत
इस रोक को संधि
आधारित
प्रतिबद्धता
में तब्दील
नहीं करना
चाहेगा।
विदेश
मंत्री ने कहा
कि अमेरिका के
साथ परमाणु
करार ने उन
देशों के साथ
ऐटमी कारोबार
का रास्ता खोल
दिया है, जो
हमारे साथ
व्यापार को
इच्छुक हैं।
यह कारोबार
संबद्ध देशों
के साथ किए
जाने वाले
समझौतों पर
निर्भर
होगा।
अमेरिकी
विदेश मंत्री
कोंडोलीजा
राइस शनिवार
को भारत आ रही
हैं। प्रणब और
राइस इस
समझौते पर
दस्तखत कर इसे
औपचारिक रूप
दे सकते
हैं।