विशेष
संवाददाता
नई
दिल्लीः
अमेरिका के
साथ डील पर
दस्तखत की
घड़ी करीब आ
रही है।
शनिवार को
अमेरिकी
विदेश मंत्री
कोंडोलीजा
राइस इसके लिए
भारत पहुंच
रही हैं।
हालांकि इस
बात को लेकर
अनिश्चितता
का माहौल है कि
शनिवार को ही
डील पर दस्तखत
हो जाएंगे।
विश्वस्त
राजनयिक
सूत्रों ने
अमेरिकी
विदेश मंत्री
राइस की भारत
यात्रा के
दौरान परमाणु
समझौते पर
दस्तखत टलने
के आसार जताए
हैं। हालांकि
राइस अपने
पूर्व
कार्यक्रम के
अनुसार आपसी
सहयोग के
विभिन्न
मसलों पर
विदेश मंत्री
प्रणब
मुखर्जी के
साथ चर्चा
करेंगी।
यहां
राजनयिक
सूत्रों के
मुताबिक
अमेरिकी
कांगेस में
पारित किए गए 123
विधेयक में
भारत के लिए
चिंता की कुछ
बातों का
निराकरण करने
के लिए
अमेरिकी
राष्ट्रपति
द्वारा अपने
दस्तखत वाला
विशेष बयान
जारी नहीं हुआ
है। इस वजह से
भारतीय पक्ष
समझौते पर
साइन करने के
लिए तैयार
नहीं हो रहा
है। भारतीय
पक्ष उम्मीद
कर रहा था कि
अमेरिकी
कांग्रेस में
पास बिल को
लेकर स्थिति
साफ की जाएगी
लेकिन
अमेरिका की ओर
से कोई लिखित
भरोसा नहीं
मिल सका है।
यहां
सूत्रों के
मुताबिक अगर
शनिवार दोपहर
तक अमेरिकी
राष्ट्रपति
की ओर से कोई
बयान नहीं आया
तो समझौते पर
दस्तखत टल
सकता है। रोचक
बात यह है कि
भारतीय पक्ष
की ओर से
अमेरिकी
विदेश मंत्री
राइस की भारत
यात्रा के
कार्यक्रम की
कोई औपचारिक
घोषणा नहीं की
गई है। विदेश
मंत्रालय के
सूत्रों के
अनुसार
शनिवार दोपहर
1:30 बजे समझौते
पर दस्तखत का
कार्यक्रम तय
किया गया है।
लेकिन
शुक्रवार रात
तक मीडिया को
इस ऐतिहासिक
मौके पर मौजूद
रहने की कोई
जानकारी नहीं
दी गई। भारतीय
पक्ष में
यूरेनियम
ईंधन की
सप्लाई की
वैधानिक
गारंटी को
लेकर सवाल
उठाए गए
है।
इस बीच,
विदेश मंत्री
प्रणब
मुखर्जी ने एक
चैनल से
बातचीत में
कहा कि हम ऐटमी
टेस्ट पर अपनी
मर्जी से लगाई
गई एकतरफा रोक
का पालन करते
रहेंगे।
लेकिन इस रोक
को किसी संधि
के तहत
कमिटमेंट में
नहीं
ढालेंगे।
विदेश मंत्री
ने कहा कि
भारत-अमेरिका
न्यूक्लियर
डील ने उन
देशों के साथ
एटमी कारोबार
का रास्ता खोल
दिया है, जो
हमारे साथ
व्यापार करने
के इच्छुक
हैं।
ऑस्ट्रेलिया
के विपक्षी
दलों ने
गठबंधन सरकार
पर भारत के साथ
ऐसी ही डील
करने के लिए
दबाव बढ़ा
दिया है। इस
बीच अमेरिका
ने पाकिस्तान
के साथ भारत
जैसी डील की
संभावनाओं से
इनकार किया
है।