भोपाल
:
ओलंपियन और
पूर्व हॉकी
खिलाड़ी असलम
शेर खान ने
भारतीय हॉकी
की खराब हालत
के लिए इंडियन
हॉकी फेडरेशन
(आईएचएफ) के
पूर्व
अध्यक्ष
केपीएस गिल को
जिम्मेदार
ठहराया है।
उन्होंने कहा
कि गिल एक
तानाशाह और
सख्त किस्म के
इंसान थे और
हॉकी के हर
मामले में दखल
देते थे। उनके
इसी रवैये के
कारण हॉकी को
काफी नुकसान
हुआ और वह
फलफूल नहीं
पाई। भारतीय
हॉकी के
उत्थान के
प्रति उम्मीद
जताते हुए
असलम ने इस
दिशा में
सरकार और खेल
प्रेमियों के
बीच समन्वित
प्रयास की
ज़रूरत पर जोर
दिया।
असलम
ने अपनी इस बात
के समर्थन में
कहा कि हॉकी को
प्रोत्साहित
करने के लिए
सरकार को
समुचित
सुविधाएं
उपलब्ध करानी
चाहिए। सुदूर
आदिवासी
क्षेत्नों
में उदीयमान
खिलाड़ियों
की तलाश कर
उन्हें
ट्रेनिंग दी
जानी चाहिए।
उन्होंने कहा,
'सरकार के
सहयोग के बगैर
यह खेल पनप
नहीं सकता।
ज़मीनी स्तर
पर प्रतिभाओं
की तलाश शुरू
की जानी चाहिए
और फिर उन्हें
ट्रेनिंग दी
जानी
चाहिए।'
देश
में हॉकी की
देखरेख के लिए
बनी इंडियन
ओलिंपिक
असोसिएशन की
तदर्थ चयन
समिति के
सदस्य असलम ने
पेइचिंग
ओलिंपिक में
हॉकी टीम के
क्वॉलिफाई
नहीं करने को
राष्ट्र के
लिए शर्मनाक
करार दिया।
उन्होंने कहा,
'इस विषय पर
समूचे देश को
सोचना चाहिए।
यह
दुर्भाग्यपूर्ण
है कि अपना देश
जो कभी इस खेल
में दबदबा
रखता था आज
अपने
अस्तित्व के
लिए संघर्ष कर
रहा है।'
क्रिकेट की
तर्ज पर हॉकी
के आयोजकों के
संबंध में
पूछे सवाल पर
असलम ने कहा कि
इस खेल के लिए
भी आयोजकों का
कोई अकाल नहीं
है, लेकिन इसके
लिए कुछ
पेशेवर और
विश्वसनीय
व्यक्तियों
को आगे आने की
जरूरत है।
पूर्व कप्तान
धनराज पिल्लै
के बारे में एक
सवाल के जवाब
में असलम ने
कहा कि वह अपनी
'पारी' खेल
चुके
हैं।
यह
पूछने पर कि
खिलाडि़यों
के सेलेक्शन
में धांधली के
चलते विदेशी
कोच छोड़कर
चले गए, तो
असलम ने कहा कि
विदेशी कोच
चयन में
भेदभाव
बर्दाश्त
नहीं कर पाते
थे। लिहाजा,
उनके हॉकी
प्रशासन के
साथ अच्छे
संबंध नहीं
थे। उन्होंने
कहा कि विदेशी
प्रशिक्षक
अपने काम में
उदासीनता
बर्दाश्त
नहीं कर सकते
थे। इतना ही
नहीं वे नहीं
चाहते थे कि
उनके काम में
कोई
हस्तक्षेप
करे।