जगदीश
जैन
चिड़ौटे
ने अपने
बच्चे को रोते
हुए देखकर
चिड़िया से
पूछा,
‘
अरे
!
बंटू क्यों रो
रहा
है?
’
चिड़िया
ने कहा,
‘
इसे
दूध दिया था,
उसमें मलाई
मांग रहा
है।
’
‘
दे
देती जरा सी
मलाई, मार
क्यों
दिया?
’
‘
इसे
बिगाड़ दूं, और
मलाई का घी
बनाकर जो रोटी
का जुगाड़ करती
हूं, उसे बंद
कर दूं?
यह
आजकल उड़-उड़कर
बड़े आदमियों
की आबादी में
जाने लगा है।
खूब अखबार
पढ़ना सीख गया
है, आजकल
अखबारों में
बड़ा आ रहा है,
मलाई बांटने
पर वीटो।
कभी
मलाईदार
मंत्रालय, तो
कभी मलाईदार
तैनाती, तो
कभी मलाईदार
नौकरी।
आदमियों को
मलाई का चस्का
लग गया है। आम
आदमी बेखबर है
कि यह मलाई
उसके खून पर जम
रही है, जिसका
स्वाद ये
देशद्रोही ले
रहे हैं। मैं
देख रही हूं कि
अपना बंटू भी
बिगड़ता जा रहा
है। इसका
अखबार पढ़ना और
आबादी में
जाना बंद
करूंगी।
’
‘
डियर,
ऐसा न करो कहीं
नहीं
बिगड़ेगा।
’
‘
न,
मैं तो यह
मानती हूँ कि
बच्चे को
खिलाए जमाई की
तरह और देखे
कसाई की तरह।
मैं कल का
चक्कर नहीं
छोड़ती हूं।
मैं अपने घर
में मानवों
जैसा तमाशा
नहीं होने
दूंगी।
’
इस
पर चिड़ौटा मौन
रहा और बंटू
मुंह में
गिलास लगाकर
खटाखट दूध पी
गया।