आजकल
केवल
बीकॉम
या
एमकॉम
से
काम
नहीं
चलता।
इसके
साथ
कुछ
अन्य
डिग्रियां
भी
जरूरी
हो
गई
हैं।
इन्हें
अगर
अच्छे
इंस्टिट्यूट
से
किया
जाए
,
तो
जॉब
की
राह
काफी
आसान
हो
जाती
है।
कॉस्ट
एंड
वर्क
अकाउंटंसी
से
संबंधित
कोर्स
भी
ऐसा
ही
एक
कोर्स
है।
द
इंस्टीट्यूट
ऑफ
कॉस्ट
एंड
वर्क
अकाउंटंट
ऑफ
इंडिया
(
आईसीडब्ल्यूएआई
)
पिछले
कई
सालों
से
लोगों
को
इस
कोर्स
में
डिग्री
दे
रहा
है।
यह
सच
है
कि
अमेरिका
से
उपजी
आर्थिक
मंदी
ने
अपना
दायरा
बढ़ाना
शुरू
कर
दिया
है।
यह
संकट
यूरोप
और
एशिया
को
भी
लपेटे
में
ले
रहा
है।
ऐसे
संकट
से
निबटने
वाले
प्रफेशनल्स
की
डिमांड
अचानक
बढ़
गई
है।
इतना
ही
नहीं
,
भविष्य
में
भी
ऐसे
प्रफेशनल्स
उपलब्ध
रहें
,
इसके
लिए
तमाम
देसी
-
विदेशी
यूनिवर्सिटीज
ने
अपने
सिलेबस
में
भी
बदलाव
किया
है।
अब
कॉस्ट
कटिंग
,
वर्क
अकाउंटिंग
,
अकाउंटिंग
मैनिजमंट
जैसे
विषयों
की
पढ़ाई
पर
अधिक
जोर
दिया
जा
रहा
है।
भारत
के
भी
कई
विश्वविद्यालय
और
संस्थान
ऐसी
ही
पढ़ाई
करा
रहे
हैं।
शायद
,
वक्त
का
तकाजा
भी
यही
है।
कॉस्ट
कटिंग
जैसी
एक्सरसाइज
कंपनियों
को
काफी
फायदा
पहुंचाती
हैं।
इस
विषय
के
जानकारों
के
माध्यम
से
कंपनी
अपने
गैरजरूरी
खर्च
में
कमी
के
रास्ते
तलाशती
है
,
जो
आर्थिक
मंदी
की
वजह
से
हर
बड़ी
और
छोटी
कंपनियों
की
जरूरत
बनता
जा
रहा
है।
ऐसे
में
कॉस्ट
अकाउंटिंग
के
जानकारों
की
मांग
में
बढ़ोतरी
होना
स्वाभाविक
है।
कॉमर्स
से
12
वीं
उत्तीर्ण
छात्रों
के
लिए
आईसीडब्ल्यूएआई
में
कोर्स
उपलब्ध
हैं।
अगर
छात्र
चाहें
,
तो
फाउंडेशन
कोर्स
भी
कर
सकते
हैं।
इसमें
चार
पेपर
होते
हैं।
इन्हें
उत्तीर्ण
कर
छात्र
कामर्स
की
अच्छी
समझ
विकसित
कर
सकते
हैं।