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सूरा-2, अल-बकरा से
19 Oct 2008, 1759 hrs IST,नवभारत टाइम्स  
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172. ऐ ईमान लानेवालों! जो अच्छी-सुथरी चीजें हमने तुम्हें प्रदान की हैं, उनमें से खाओ और अल्लाह के आगे कृतज्ञता दिखलाओ, यदि तुम उसी की बंदगी करते हो।

173. उसने तो तुम पर केवल मुर्दार और खून और सूअर का मांस और जिस पर अल्लाह के अतिरिक्त किसी और का नाम लिया गया हो, हराम ठहराया है। इस पर भी जो बहुत मजबूर और विवश हो जाए, वह अवज्ञा करनेवाला न हो और न सीमा से आगे बढ़नेवाला हो तो उस पर कोई गुनाह नहीं। निस्संदेह अल्लाह अत्यंत क्षमाशील, दयावान है।

174. जो लोग उस चीज को छिपाते हैं, जो अल्लाह ने अपनी किताब में से उतारी है और उसके बदले थोड़े मूल्य का सौदा करते हैं, वह तो बस आग खाकर अपने पेट भर रहे हैं और कियामत के दिन अल्लाह न तो उनसे बात करेगा और न उन्हें निखारेगा और उनके लिए दुखद यातना है।

175. यही लोग हैं जिन्होंने मार्गदर्शन के बदले पथभ्रष्टता मोल ली और क्षमा के बदले यातना के ग्राहक बने। तो आग को सहन करने के लिए उनका उत्साह कितना बढ़ा हुआ है!

176. वह (यातना) इसलिए होगी कि अल्लाह ने तो हक के साथ किताब उतारी, किंतु जिन लोगों ने किताब के मामले में विभेद किया वह हठ और विरोध में बहुत दूर निकल गए।

177. नेकी केवल यह नहीं है कि तुम अपने मुंह पूरब और पश्चिम की ओर कर लो, बल्कि नेकी तो उसकी नेकी है जो अल्लाह, अंतिम दिन, फरिश्तों, किताब और नबियों पर ईमान लाया और माल, उसके प्रति प्रेम के बावजूद, नातेदारों, अनाथों, मुहताजों, मुसाफिरों और मांगनेवालों को दिया और गर्दनें छुड़ाने में भी और नमाज कायम की और जकात दी और अपने वचन को ऐसे लोग पूरा करनेवाले हैं जब वचन दें और तंगी और विशेष रूप से शारीरिक कष्टों में और लड़ाई के समय में जमनेवाले हैं। ऐसे ही लोग हैं जो सच्चे सिद्ध हुए और वही लोग डर रखनेवाले हैं।

178. ऐ ईमान लानेवालों! मारे जानेवालों के विषय में हत्यादण्ड (किसास) तुम पर अनिवार्य किया गया, स्वतंत्र-स्वतंत्र बराबर हैं और गुलाम-गुलाम बराबर हैं और औरत-औरत बराबर हैं। फिर यदि किसी को उसके भाई की ओर से कुछ छूट मिल जाए, तो सामान्य रीति का पालन करना चाहिए और भले तरीके से उसे अदा करना चाहिए। यह तुम्हारे रब की ओर से एक छूट और दयालुता है। फिर इसके बाद भी जो ज्यादती करे तो उसके लिए दुखद यातना है।
( सूरा अल-बकरा की 286 आयतें मदीना में उतरी थीं)
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