नई
दिल्ली :
साईं
प्रज्ञाधाम,
साकेत में
प्रवचन करते
हुए स्वामी
प्रज्ञानंद
महाराज ने कहा
कि यज्ञ
आध्यात्मिक
समाजवाद का
जनक है। केवल
सुगंधित
पदार्थों की
आहुति देना ही
यज्ञ नहीं,
वरन् अपनी
क्षमताओं को
लोक मंगल में
लगाना ही
वास्तविक
यज्ञ है। यज्ञ
का असली अर्थ
है, जो सुख
समृद्धि
ईश्वर ने आपको
दी है उसका
अपने लिए
न्यूनतम तथा
दूसरों के लिए
अधिकतम
प्रयोग
हो।
दिव्य
ज्योति
जागृति
संस्थान
द्वारा
पीतमपुरा में
आयोजित
सत्संग में
स्वामी
नरेंद्रानंद
ने कहा कि इस
मानव जीवन का
लक्ष्य
परमात्मा
रूपी प्रकाश
(ज्योति) से
जुड़ जाना है।
जैसे प्रकाश
के प्रकट होने
से अंधेरा दूर
हो जाता है,
उसी प्रकार
मानव के जीवन
में ज्ञान
रूपी प्रकाश
प्रकट होने से
जन्मों के
कर्म संस्कार
समाप्त हो
जाते हैं।
दीपावली का
यही संदेश
है।
सीनियर
सिटिजन
काउंसिल ऑफ
दिल्ली
द्वारा डीयर
पार्क, हौजखास
में आयोजित
सत्संग में पं.
आदित्य
प्रकाश
त्रिपाठी ने
कहा कि यह मानव
शरीर हमें
पुण्य कर्म
तथा परमात्मा
की आराधना के
लिए मिला है।
ऐसा करने से
अद्भुत
आत्मिक आनंद
मिलता
है।
श्री
राजमाता
झंडेवाला
मंदिर, कबूल
नगर में
आयोजित
कार्तिक मास
अनुष्ठान के
अवसर पर संत
राजेश्वरानंद
ने कहा कि
सुख-दुख सभी
मनुष्यों पर
समान रूप से
आते हैं परंतु
ज्ञानी जन
दोनों स्थिति
में समभाव
रखते हैं। वे
विपत्ति के
समय को हंसकर
काटते हैं,
जबकि अज्ञानी
जन विपत्ति को
रोकर काटते
हैं। ऐसा करके
वे स्वयं को
संसार में और
भी अधिक उलझा
लेते हैं।