चंद्र
प्रकाश,
दिल्ली
सूचना,
विभाग से
मांगें
या
फिर सूचना का
अधिकार ही
समाधान है?
दिल्ली में
अलग-अलग जगहों
पर उचित दर की
दुकानें अपनी
सुविधा और
साधन के आधार
पर ही राशन दे
रही हैं। जनता
के लिए कोई
नोटिस बोर्ड
दुकान पर नहीं
मिलता। फुड और
सिविल सप्लाई
कमिश्नर का
कार्यालय
कहता है कि
वितरण विभाग
से पता करो।
वितरण विभाग
को इस बारे में
कोई जानकारी
नहीं।
फुड
एंड सिविल
सप्लाई
मंत्रालय, फुड
एंड सिविल
सप्लाई
कमिश्नर के
पास भेज देता
है। चीफ
मिनिस्टर के
कार्यालय को
पूछो तो भी कोई
उत्तर नहीं
है। जनता
मेहनत
मज़दूरी में
व्यस्त है।
चुनाव होंगे,
गुणगान होगा
और सरकार भी
बनेगी। जनता
लुटेगी, अपने
ही
प्रतिनिधियों
द्वारा।
सरकारी
कर्मचारी को
अपने काम या
ज़िम्मेदारी
का पता नहीं
है। ऐसे मैं
कौन सुरक्षित
है, हम या वे?
व्यस्था कहां
है, हमें जवाब
चाहिए?