60. उन
लोगों से जब
कहा जाता है कि
'रहमान को सजदा
करो' तो वे
कहते हैं : और
रहमान क्या
होता है? क्या
जिसे तू हमसे
कह दे उसी को
हम सजदा करने
लगें? और यह
चीज उनकी घृणा
को और बढ़ा
देती है।
61.
बड़ी
बरकतवाला है
वह, जिसने आकाश
में बुर्ज
(नक्षत्र) बनाए
और उसमें एक
चिराग और एक
चमकता चांद
बनाया।
62. और
वही है जिसने
रात और दिन को
एक-दूसरे के
पीछे आनेवाला
बनाया, उस
व्यक्ति के
लिए (निशानी)जो
चेतना चाहे या
कृतज्ञ होना
चाहे।
63.
रहमान के
(प्रिय) बन्दे
वही हैं जो
धरती पर
नम्रतापूर्वक
चलते हैं और जब
जाहिल उनके
मुंह आएं तो कह
देते हैं : तुम
को सलाम।
64. जो
अपने रब के आगे
सजदे में और
खड़े रातें
गुजारते
हैं,
65. जो
कहते हैं कि 'ऐ
हमारे रब,
जहन्नम की
यातना को हम से
हटा दे।'
निश्चय ही
उसकी यातना
चिमटकर
रहनेवाली
है।
66. निश्चय
ही वह जगह
ठहरने की
दृष्टि से भी
बुरी है और
स्थान की
दृष्टि से
भी।
67. जो खर्च
करते हैं तो न
तो अपव्यय
करते हैं और न
ही तंगी से काम
लेते हैं,
बल्कि वे इनके
बीच मध्य
मार्ग पर रहते
हैं।
68. जो
अल्लाह के साथ
किसी दूसरे
इष्ट-पूज्य को
नहीं पुकारते
और न नाहक किसी
जीव को जिस (के
कत्ल) को
अल्लाह ने
हराम किया है,
कत्ल करते हैं
और न वे
व्यभिचार
करते हैं -जो
कोई यह काम करे
वह गुनाह के
बवाल से दोचार
होगा।
(
सूरा
अल-फुरकनकी ये
77 आयतें मक्का
में उतरी
थीं।)