ओबामा या मैक्केन...भारत के लिए बेहतर कौन ?-फोकस-विचार मंच-Navbharat Times
 
ओबामा या मैक्केन...भारत के लिए बेहतर कौन ?
1 Nov 2008, 2359 hrs IST,नवभारत टाइम्स  
 प्रिन्ट  ईमेल  Discuss  शेयर  सेव  कमेन्ट टेक्स्ट:
अमेरिकी चुनावों पर इस वक्त दुनिया के साथ-साथ भारत की भी निगाहें टिकी हुई हैं। बराक ओबामा या जॉन मैक्केन... भारत के लिए दोनों में कौन बेहतर होगा और दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सामरिक रिश्ते को नए आयाम तक ले जाएगा, आइए जानते हैं :

पहले बात ओबामा की...ओबामा भारतीय संस्कृति और यहां के विचारों से काफी प्रभावित हैं। शायद यही वजह है कि उनके दफ्तर में महात्मा गांधी का एक फोटो भी टंगा है, जिसके बारे में ओबामा ने कहा था कि गांधी उन्हें इस बात की याद दिलाते हैं कि एक साधारण आदमी भी असाधारण काम कर सकता है। वह अपने साथ भगवान हनुमान का ताबीज भी रखते हैं। ये तो थी ओबामा के भारतीय संस्कृति से जुड़ाव की। अब बात राजनीति और सामरिक मसलों की। इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में परमाणु करार का मसला है और ओबामा उसके पक्ष में हैं। उन्होंने इसके पक्ष में वोट किया।

हाइड एक्ट को कांग्रेस में मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बिडेन की छवि तो भारत के अच्छे दोस्त की रही है। आतंकवाद के मसले पर भी ओबामा भारत के मददगार ही लग रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया है कि अमेरिका से मिल रही सहायता का पाकिस्तान भारत के खिलाफ लड़ाई की तैयारी में कर रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर वह सत्ता में लौटते हैं तो तालिबान और आतंकवाद के खिलाफ मुहिम के लएल पाकिस्तान अफगानिस्तान सेना को पहला निशाना बनाएंगे। ओबामा के बयानों का विश्लेषण करें तो साफ है कि वह चाहते हैं पाकिस्तान का फोकस कश्मीर से हटकर अफगानिस्तान पर चला जाए।

ओबामा भारत को नई ताकत मानते हैं और कहते हैं कि उसके साथ अच्छे रिश्ते रखने की वह भरपूर कोशिश करेंगे। लेकिन आउटसोर्सिन्ग के मसले पर भारतीयों को ओबामा से थोड़ी निराशा हो सकती है। उनका कहना है कि वह आउटसोर्सिन्ग करनेवाली कंपनियों को दी जानेवाली छूट को खत्म करने के पक्ष में हैं। इसके अलावा उनका संरक्षणवादी रवैया, एक्सपोर्ट सब्सिडी और अमेरिकी किसानों को ज्यादा सब्सिडी का समर्थन, विदेशी प्रफेशनल्स को वीजा घटाने की बात करना अप्रत्यक्ष तरीके से भारत पर असर डाल सकता है।

मैक्कन भी भारत को अहम ताकत के रूप में देखते हैं, इसलिए जब बात जी-8 में भारत को शामिल करने की आई तो उन्होंने भारत जैसी ताकत को उसमें शामिल किए जाने का समर्थन किया। ओबामा की तरह मैक्केन भी परमाणु करार के पक्षधर हैं और शुरू से ही इस डील के समर्थन में हैं। उनका मानना है कि जो देश शांतिपूर्ण मकसद के लिए परमाणु कार्यक्रम करना चाहते हैं, उनकी मदद की जानी चाहिए।

इससे उनकी जरूरतें पूरी हो सकेंगी, जबकि ईरान जैसे देशों के कार्यक्रमों पर फौरन रोक लगनी चाहिए। वैसे, पाकिस्तान के समले पर मैक्केन का रुख थोड़ा नरम है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर हमलों की उन्होंने कड़ी आलोचना की थी और इस मुद्दे पर बयान के लिए ओबामा को आड़े हाथों लिया था। आतंकवाद खत्म करने के लए मैक्केन का ध्यान अफगानिस्तान पर कम और इराक पर ज्यादा है। वह पाकिस्तान को अपना दोस्त मानते हैं और दोस्त के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई को सही नहीं ठहराते।

आउटसोर्सिन्ग पर उनकी राय थोडी़ नरम है और ग्लोबल कॉम्पीटिशन के हिमायती हैं। वह व्यापार प्रतिबंध की मुखालफत कर चुके हैं और अमेरिकी निर्माताओं को दी जानेवाली सब्सिडी के भी खिलाफ हैं। उनकी आर्थिक नीतियां भारत के पक्ष में हो सकती हैं।
 प्रिन्ट  ईमेल  Discuss  शेयर  सेव  कमेन्ट टेक्स्ट:
 
इसी सेक्शन में ये भी पढ़ें

और >>

स्पेशल स्टोरी
सच बोलने की सज़ा
पाक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दुर्रानी बर्खास्त...
और >>
फोटो धमाल
सेक्स के 10 फायदे
चांदनी चौक टु चाइना|और >>
जोश-ए-जवानी
फटाफट फन का फंडा
काम के तनाव के बीच सेक्स का आनंद आपको...
और >>
मूवी मस्ती
'बहुत कम सेक्स किया है'
पैरिस हिल्टन ने चंद लोगों के साथ ही सेक्स किया है...
और >>
मुस्कुराइए
एक रुपए का पेट्रॉल
संता पेट्रॉल पंप पर पेट्रॉल भरवाने गया...
और >>
 
कैसा रहेगा आज का दिन?
Shop
Rose Bunch Rs 265
Micro Hair Dryer Rs 99
और >>
Travel
Holidays
Patnitop - 2N/3D Rs 3,100
Manali - 3N/4 Rs 1,799
Lonavla - 2N/3D Rs 5,115
और >>
Mobile 58888
Send free SMS
Filmiguru contest
और >>