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रोना छोड़ो, दुनिया बदलने की कोशिश करो : सुनीता राव 12 Nov 2008, 1404 hrs IST
सुनीता
राव
मैं
मनुष्य
की चेतना के
बहुत परे किसी
उच्च शक्ति
में भरोसा
रखती हूं।
हमें एक
व्यक्ति के
रूप में बस
अपना काम करना
है और उसे
अच्छे से करना
है।
मुझे
पता है कि मुझे
ठीक इस क्षण भी
कोई देख रहा
है। पर आप उस
वस्तु
,
व्यक्ति
या सत्ता को
क्या पुकारते
हैं
,
यह
व्यक्तिगत
है। लोग पूछते
हैं
,
क्या
मैं
प्रार्थना
करती हूं...
निश्चित रूप
से। पर यह एक
बातचीत की तरह
है - खुद से
,
जिंदगी
से
,
उस
सबसे जो मेरे
चारों ओर हो
रहा
है।
मेरी
ज़िंदगी में
बहुत-कुछ गलत
हुआ है पर फिर
भी मुझे लोगों
की अच्छाई में
हमेशा भरोसा
रहा।
नकारात्मक
सोच वालों के
कथन के विपरीत
यह दुनिया असल
में उतनी बुरी
जगह नहीं। मैं
कोशिश करती
हूं कि जब
दूसरों के साथ
कुछ गलत हो रहा
हो तो मैं उससे
प्रभावित न हो
जाऊं पर यह इस
कारण नहीं कि
मैं
असंवेदनशील
हूं - बल्कि सच
इसके विपरीत
है। मैं मानती
हूं कि अगर मैं
भी उसके असर
में आ गई तो वह
मुझे कमजोर और
कुछ कर सकने के
नाकाबिल बना
देगा। अगर आप
मोटी चमड़ी के
नहीं हैं तो आप
उस अन्याय का
मुकाबला कैसे
करेंगे
?
मैं
कोई महान
परोपकारी
नहीं हूं पर
मैं शब्द से
ज़्यादा कर्म
में भरोसा
रखती हूं। मैं
मानती हूं कि
किसी चीज को
सुधारने का
एकमात्र
तरीका यही है
कि आप छोटा ही
सही
,
कुछ
करें। जो हो
चुका उस बारे
में बैठकर
सोचते रहने और
निराश होने
में कुछ रखा
नहीं है। मेरा
मानना यह है कि
चीजों को
बदलने की
कोशिश की
जाए।
जब
कुछ गलत होता
है मैं ऊपर
वाले से सवाल
जरूर करती
हूं। पर फिर
से
,
मेरे
लिए कर्म ही
महत्वपूर्ण
है। या तो
चीजों को सही
करने की कोशिश
की जाए या फिर
अगर वे बदली
नहीं जा सकतीं
तो आगे बढ़ जाया
जाए। मेरा
मानना है कि हर
व्यक्ति के
लिए ईश्वर की
अलग-अलग समझ हो
सकती है लेकिन
उसका जो एक
संपूर्ण अर्थ
है
,
मेरे
लिए वही
महत्वपूर्ण
है। मेरे लिए
जीवन की
छोटी-छोटी
उपलब्धि बहुत
मायने रखती है
और उन्हीं से
मैं ढेर सारी
खुशियां
हासिल करती
हूं।
मैं
जैसा कहती और
करती हूं
,
उसके
आधार पर लोग
मुझे
धार्मिक
,
आध्यात्मिक
,
कर्मकांडी
या तीनों मान
सकते हैं। पर
मैं
व्यक्तिगत
रूप से लेबल्स
में भरोसा
नहीं रखती। यह
मेरा स्टाइल
नहीं है। मैं
अंधविश्वासी
भी नहीं हूं
,
कभी
कभार के
‘
टचवुड
’
को
छोड़कर! मैं
नहीं समझती कि
जिंदगी
क्लीशे के रूप
में जी जा सकती
है। यह
ज़्यादा
ज़रूरी है कि
आप सबसे अलग
हों।
शांति
हर कोई चाहता
है और मैं
उन्हें
छोटी-छोटी
चीज़ों में
ढूंढती और
पाती हूं जैसे
समुद्र के
किनारे या
संगीत सुनते
हुए। लोग
सोचते होंगे
कि संगीत मेरा
पेशा है और मैं
उसे पेशे के
तौर पर ही लेती
होऊंगी।
लेकिन सच इसके
उलट है। मैं जब
गाती हूं तो
लगता ही नहीं
कि यह कोई काम
है। दरअसल
संगीत मुझे
शांति देता
है। वह मेरा
तनाव कम करता
है और मुझे
अपने अंतस् से
जुड़ने में
मदद करता
है।
मैंने
महिलाओं और
बच्चों के
अधिकारों के
लिए हमेशा
लड़ाई लड़ी है।
और अब मेरा
संगीत भी इसी
दिशा में
सक्रिय है।
असल में मेरे
लेटेस्ट
रिलीज
'
सुन
जरा
'
की
एक पंक्ति है -
when you know things are getting real rough, you’ve got to be tough
enough’ (
जब आप
जानते हैं कि
चीजें इतनी
आसान नहीं है
,
तब आपको
बहुत मजबूत
होना होता है)।
इसमें मैं
गहरा यकीन
रखती हूं। और
चाहती हूं कि
हर महिला इस पर
अपना भरोसा
रखे।
अंग्रेज़ी
से अनुवाद
–
नीला
प्रसाद
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