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मंदी में सीनियर क्रिकेटरों से सीखिए
8 Nov 2008, 2359 hrs IST,हेलो दिल्ली  
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जॉब मार्केट में इन दिनों अफरातफरी का माहौल है। अमेरिकी मंदी ने जॉब मार्केट को ठंडा करना शुरू कर दिया है। क्या आप भी इसके शिकार होने जा रहे हैं? इस समय आपको टीम इंडिया के कुछ सीनियर खिलाड़ियों से हुए बर्ताव से भी शिक्षा मिल सकती है :

क्या आपको अपना वर्क प्रोफाइल बहुत पसंद है, लेकिन वो जगह पसंद नहीं है, जहां आप काम करते हैं। क्या ऑफिस की वर्क कल्चर आपको रास नहीं नहीं आ रही है या अपने साथियों से आप को कोई परेशानी है। अगर आपको काम करने का उचित माहौल नहीं मिलता तो आप अपना सौ पर्सेन्ट कभी नहीं दे पाएंगे और दफ्तर में समय गुजारना आपके लिए काफी मुश्किल हो जाएगा।

अगर आपको कहीं से जॉब का ऑफर मिल रहा है और आप इस कशमकश में है कि नई नौकरी जॉइन की जाए या पुरानी जॉब ही की जाए। अगर आपको दफ्तर के माहौल और साथियों के बर्ताव या आदतों से कोई परेशानी है तो मौका मिलते ही आपका किसी नई जगह जाना ठीक रहेगा।

कलीग्स का असहयोग

ऑफिस में ऐसे कुछ लोग होते हैं, जिन्हें इधर की बात उधर करने की आदत होती है। लेकिन ऐसे लोगों से आप अच्छे संबंध नहीं बना सकते तो बिगाड़कर भी मत रखिए। वक्त पड़ने पर उनसे काम भी निकाला जा सकता है। दफ्तर में अगर कोई किसी को नापसंद करता है तो उसकी झलक उसकी बॉडी लैंग्वेज में मिल जाती है।

कुछ लोगों को दूसरों की शिकायतें करने के सिवा दफ्तर में कोई दूसरा काम नहीं होता। इन लोगों के पास शिकायती और गप्पबाजी का मसाला हरदम मौजूद रहता है। वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें दूसरों को बेमतलब परेशान करने में मजा आता है। यह अपना कोई सॉफ्ट टारगेट तलाश करते रहते हैं। कई बार छोटी-छोटी बातों जैसे म्यूजिक की साउंड कम करने और बैठने की जगह को लेकर झगड़ा हो जाता है।

साथियों से बढ़ती दूरी

अगर किसी व्यक्ति को कंपनी के नए-नए फैसलों या रिपोर्ट्स की जानकारी नहीं मिलती तो यह पुरानी कंपनी को अलविदा कहने का पहला संकेत है। अगर आपके बॉस आपको किसी मीटिंग में बुलाना आसानी से भूल जाते हैं, तो आपको ओल्ड ऑफिस से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इसके अलावा अगर आपको पार्टियों या गेट-टुगेदर की जानकारी नहीं मिलती तो इसका मतलब है कि आपकी अपने साथियों से दूरी बढ़ती जा रही है।

काम का प्रेशर लेकर घर मत जाइए

अगर ऑफिस में आस-पास के माहौल से तनाव बढ़ता जा रहा है तो इससे आप की वर्क क्वॉलिटी और आउटपुट पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा। इससे आपकी पर्सनल लाइफ भी अछूती नहीं रहेगी। आपका स्वास्थ्य बिगड़ेगा, वो अलग। दफ्तर में काम खूब कीजिए, लेकिन किसी तरह का प्रेशर लेकर घर मत जाइए। इससे कोई फायदा नहीं होगा।

बॉस का नेचर

अगर आपको अपने काम में भरपूर मजा आ रहा है, लेकिन बॉस का नेचर अच्छा नहीं है तो आप उस जगह ज्यादा देर तक टिक नहीं सकते। प्रफेशनल रूप से संतुष्टि के अहसास और काम में सफलता के लिए आपका बॉस के साथ अच्छे संबंध होना निहायत जरूरी है। अगर आप अपने बॉस को हटाने या उसे बदलने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं तो इसमें सफलता मिलने के चांस बहुत ही कम हैं। अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के लिए काम कर रहे हैं, जहां से आपको कोई सहयोग नहीं मिलता तो आपका जॉब चेंज करना निहायत जरूरी हो जाता है।

हर 10 मिनट बाद घड़ी देखना

ऑफिस पर कोई व्यक्ति नेट की अलग-अलग साइट्स पर विजिट कर या 'यू ट्यूब' पर विडियो देखकर अपना सारा समय नहीं बिता सकता। अगर आपको कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाती या आपके पास करने के लिए कुछ खास नहीं है तो नौकरी गंवाने का खतरा आप पर मंडरा रहा है।

आपके आइडियाज की कोई कीमत नहीं

क्या आप कोई बात कहते हैं या कोई सुझाव रखते हैं तो आपकी बात को उतनी अहमियत नहीं दी जाती, जितनी पहले दी जाती है। अगर किसी संस्थान में आपके पास आगे बढ़ने के अवसर नहीं हैं, बॉस आपको इग्नोर करते हैं और साथियों ने आपको बिल्कुल अकेला छोड़ दिया है। आपको महत्वपूर्ण प्रॉजेक्ट से अलग रखा जाता है तो आप किसी जगह अपनी एनर्जी और टाइम क्यों बर्बाद कर रहे हैं?

टॉप स्लॉट में बदलाव

जैसे धोनी और गौतम गंभीर की एक दिवसीय क्रिकेट टीम में द्रविड और गांगुली के लिए कोई जगह नहीं है। कुछ वैसा ही सीन क्या आपके ऑफिस में भी है। अगर आपकी कंपनी में कोई नया बॉस कमान संभालता है तो वह नई भर्ती तो करेगा ही। अगर मैनिजमंट की ओर से उसे अपनी टीम को कसने के लिए कहा जाता है तो यह नया बसेरा तलाशने का परफेक्ट समय है।

24 घंटे की परेशानी ठीक नहीं

आप इस समय किस तरह की ज़िंदगी जी रहे हैं। क्या एक हफ्ते में 40 घंटे की जॉब के बारे में आप सातों दिन चौबीस घंटे सोचते रहते हैं। आपकी सैलरी तो साल में एक बार बढ़ती है, लेकिन आपकी वर्क क्वॉलिटी और जॉब सेटिस्फेक्शन से यह फैसला होता है कि आप खुश हैं या नहीं। आप एक दिन में अपनी नौकरी को कितना समय देते हैं, माहौल कैसा है, आपके बॉस और सबऑर्डिनेट्स आपके काम को कैसे देखते हैं।

आगर आपका दफ्तर में समय बीतना काफी मुश्किल लग रहा है तो यह आपके जॉब बदलने का ठीक समय है। अगर किसी नौकरी से आपकी क्रिएटिवटी, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है तो वह जगह छोड़ना ही ज्यादा अच्छा है।

माहौल और वर्क कल्चर से तालमेल

अगर आपको मौजूदा माहौल में काम करने में मजा नहीं आ रहा है। तो आपको अब तक तो यह पता लग ही गया होगा कि आपको किस तरह के इन्वॉइरन्मंट की जरूरत है और कौन सा काम आप बेहतर ढंग से कर सकते हैं। अगर आप इन सब बातों को ध्यान में रखकर जॉब की तलाश करेंगे तो आपकी वर्क क्वॉलिटी निखर कर आएगी।
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