धनंजय
महापात्र
नई
दिल्ली
:
चीफ जस्टिस
ऑफ इंडिया
(सीजेआई) के. जी.
बालाकृष्णन
ने गाजियाबाद
के 23 करोड़
रुपए के पीएफ
घोटाले में 34
जजों के शामिल
होने के
आरोपों के
प्रति कड़ा
रुख अपनाया
है। सबसे पहले
इलाहाबाद हाई
कोर्ट के जज ए.
के. सिंह के
खिलाफ ऐक्शन
लिया जा रहा
है, जिन्हें
अगले हफ्ते से
जुडिशरी को
गुडबाय कहने
को कहा
जाएगा।
बालाकृष्णन
ने जस्टिस
सिंह के खिलाफ
इन-हाउस
रिपोर्ट को
देखते हुए यह
निर्णय लिया
है। उन्हें
परमानेंट
नहीं किया
जाएगा।
इलाहाबाद हाई
कोर्ट के दो और
जजों के भी
इसमें शामिल
होने की
रिपोर्ट है।
चूंकि वे
परमानेंट जज
हैं, इसलिए
उनके साथ अलग
तरह से निपटा
जाएगा। चीफ
जस्टिस ऑफ
इंडिया ने
टाइम्स ऑफ
इंडिया से एक
एक्सक्लूसिव
बातचीत में यह
कहा।
सीजेआई को
जुडिशरी में
भ्रष्टाचार
से निपटने का
अनुभव है। कुछ
लोगों के
खिलाफ करप्शन
के पुख्ता
सबूत मिलने के
बाद उनसे
इस्तीफा ले
लिया गया। यही
नहीं,
भ्रष्टाचार
के पुख्ता
सबूत मिलने के
बाद रिज़ाइन न
करने पर
कलकत्ता हाई
कोर्ट के जज
सौमित्र सेन
के खिलाफ
महाभियोग
चलाने के लिए
कहा जा चुका
है।
बालाकृष्णन
ने कहा,
'जुडिशरी में
करप्शन
बर्दाश्त
नहीं किया
जाएगा, चाहे
इसके लिए कुछ
भी कीमत क्यों
न चुकानी
पड़े।'
गौरतलब है कि
पीएफ घोटाले
की वजह से
न्यायपालिका
की इमेज खराब
हुई है। यूपी
पुलिस ने 34
जजों के खिलाफ
ठोस सबूत पाए
हैं। इन लोगों
के खिलाफ
गाजियाबाद
जुडिशरी में
थर्ड और फोर्थ
ग्रेड के
कर्मचारियों
के 23 करोड़
रुपए के फर्जी
पीएफ
विथड्रॉल
घोटाले में
शामिल होने का
आरोप है।