हरेंद्र
सिंह रावत,
न्यूयॉर्क
(यूएसए)
एक
समय की
बात
है। मुंबई के
गेट वे ऑफ
इंडिया के
बाहर मछवारों
की एक बस्ती
थी। उस बस्ती
में एक दंपती
रहता था। पति
का नाम था
बदानी उम्र
पचास साल,
पत्नी का नाम
था गुस्सैली
रानी उम्र 44
साल ! शादी के 22
साल बाद भी
उन्हें संतान
का सुख नहीं
नसीब हुआ था!
बदानी एक नेक
दिल इंसान था!
वह बहुत कम बात
करता था,
पास-पड़ोसियों
के दुख-सुख में
शामिल होता था,
समय पड़ने पर
शारीरिक मदद
देने को हर
वक्त तैयार
रहता था! उनके
घर में हमेशा
आर्थिक तंगी
रहती थी,
इसीलिए उसकी
पत्नी हमेशा
तनाव और
गुस्से में
रहती थी!
पास-पड़ोसियों
से ही नहीं,
बल्कि
अपने
पति से भी वह
हमेशा झगड़ा
करती थी!
बदानी हर
रोज सुबह-सुबह
मछली पकड़ने
के लिए
घर से निकल
पड़ता था और
रात तक घर
पहुंच पाता था!
जो कुछ भी मछली
वह पकड़ पाता,
उसमें से कुछ
बेच देता था और
उस पैसे से घी
तेल, नमक,
मिर्च मशाला,
चीनी,
चाय, चावल,
कपड़े, घर का
ज़रूरी सामान
खरीद कर लाता
था! कुछ मछली
बचाकर
खाने के लिए
घर ले आता था!
घर-गृहस्थी की
गाड़ी किसी
तरह चल रही थी!
बदानी ईश्वर
पर भरोसा करने
वाला था। उसे
यकीन था कि कभी
न कभी भगवान
उसकी भी
सुनेंगे और
उसकी
ग़रीबी
दूर करेंगे!
लेकिन पत्नी
सदा तनाव में
रहती थी! वह
अपनी इस
ग़रीबी के लिए
अपने पति को
ही
दोषी समझती
थी और बात-बात
पर झगड़ती
रहती थी!
मौसम खराब
रहने के कारण
दो-तीन दिन से
समुद्र में
तेज तूफान और
लहरों के कारण
बदानी मछली
पकड़ने में
नाकाम रहा! घर
में खाने को
कुछ भी शेष न
था!
एक दिन
सुबह जब बदानी
मछली पकड़ने
घर से निकला,
तो पत्नी ने
गुस्से से कहा,
'आना तो मछली
लेकर, नहीं तो
घर नहीं आना!'
बेचारा बदानी
किस्मत का
मारा समुद्र
के किनारे
बैठा अपनी
किस्मत को कोस
रहा था! अचानक
जाल में कुछ
हलचल हुई! उसने
जाल बाहर
निकालकर देखा,
तो उसमें एक
छोटी-सी मछली
फंसी हुई थी!
उसके सिर पर एक
चमकती हुई मणि
थी! स्वयं भी
नन्ही मछली
बड़ी सुंदर लग
रही थी! जैसे
ही उसने मछली
को पकड़ने के
लिए हाथ
बढ़ाया, उसके
कानों में एक
मधुर स्वर
गूंज उठा, जैसे
मछली कह रही
हो,
'
अगर
तुम मुझे छोड़
दोगे, तो मैं
तुम्हारी
इच्छा हमेशा
पूरी करती
रहूंगी!
'
उसने आज के
खाने के लिए
खाना मांगा, तो
मछली ने उसे एक
कटोरा दिया, जो
उसको जैसे भी
खाने की इच्छा
होगी, वही खाना
तैयार मिलेगा!
जब भी तुम यहां
पर आकर मुझे
पुकारोगे, मैं
आकर तुम्हारी
इच्छापूर्ति
करती
रहूंगी!
बदानी
खुशी-खुशी
कटोरे को लेकर
घर चला
गया!
उस दिन
दोनों ने छक कर
खाना खाया!
लेकिन पत्नी
को चैन नहीं
आया! अगले दिन
उसने पति से
कहा कि जाओ और
मछली से एक
सुंदर
सज़ा
-
सजाया
महल मांग कर
लाओ! जब बदानी
घर आया, तो
देखा कि उसकी
झोपड़ी की जगह
एक सज़ा-सजाया
महल खड़ा है!
पत्नी को फिर
भी चैन नहीं
आया, बोली कल
सबेरे ही जाकर
मछली से कार,
हरा-भरा पार्क,
फूलों भरा
बगीचा और बहुत
सारा
सोना-चांदी
मान कार लाना!
बदानी भरे मान
से समुद्र के
किनारे गया और
मछली से यह सब
कुछ मांगा!
मछली अब कुछ
नाराज़-सी
नज़र आई, फिर
भी बदानी और
उसकी पत्नी की
सारी मांगें
पूरी कर दी गई!
बदानी जब शाम
को घर आया, तो
क्या देखता है
कि उसका घर अब
सब
सुख-सुविधाओं
से सम्पन एक
राजा का महल लग
रहा है, जहां
गाड़ी भी है,
ड्राइवर भी है,
बगीचा है, तो
माली भी है,
हरा-भरा पार्क,
फुहारे लगे
हुए! फूलों की
खुशबू, भंवरों
का स्वर,
पेड़-पौधे, उन
पर बैठी हुई
कोयल मधुर
स्वर से गाती
हुई
!
सोना-चांदी,
नौकर-चाकर सभी
कुछ तो मिल गया
था, उन्हें उस
नन्नी सी
मच्छली से!
लेकिन
उसकी
पत्नी
गुस्सैली
रानी फिर भी
खुश नहीं हुई !
पति से गुस्से
से बोली कल फिर
जाना और
मच्छली से
कहकर मुझे
विश्व सुंदरी
मलि्लका-ए-आज़म
बना दे! बेचारा
बदानी आज फिर
बड़ा मायूस
होकर मछली के
पास आया और भरे
गले से अपनी
पत्नी
गुस्सैल रानी
की माँगे मछली
को बतलाई! मछली
गुस्से से लाल
हो गई और यह
कहते हुए कि
जाओ तुम्हें
यह सब कुछ नहीं
सुहाता, तुम
जैसे थे वैसे
ही हो जाओ! फिर
बदानी और उसकी
पत्नी
गुस्सैल रानी
जैसे थे, वैसे
ही दुबारा हो
गए!