कर्नाटक
का दूसरा
बड़ा शहर
मैसूर पुरानी
सभ्यता और
आधुनिक कल्चर
का अनूठा मेल
है। कभी शाही
परिवारों का
ठिकाना रहा है
शहर अपने पास
11वीं शताब्दी
की धरोहर तक
समेटे है।
जानते हैं
इसके बारे में
:
मैसूर
के महल
कभी
कर्नाटक की
राजधानी रह
चुका मैसूर
शाही सभ्यता
का प्रतीक है
और शहर में आज
भी इसके तमाम
उदाहरण देखने
को मिलते हैं।
यहां की
संस्कृति को
छह महलों में
देखा जा सकता
है। चेलुवंबा
मेशन, जगमोहन
पैलेस,
जयलक्ष्मी
विलास, करांजी
मेशन, ललिता
महल और मैसूर
पैलेस की
भव्यता और
मौजूदा
स्वरूप के
पीछे कोई न कोई
कहानी जरूर
है। इसे वहां
के गाइड से
जरूर
जानें।
मैसूर
के
मंदिर
भरे-पूरे
कल्चर के चलते
मैसूर में
आपको बहुत से
मंदिर
मिलेंगे।
यहां आप
लक्ष्मीनारायण
मंदिर, श्वेत
वराहस्वामी
मंदिर,
महाबलेश्वर
मंदिर,
प्रसन्ना
कृष्णास्वामी
मंदिर जरूर
देखें।
मैसूर
के
म्यूजियम
मैसूर
में पांच
म्यूजियम
हैं। इसमें से
रेलवे
म्यूजियम में
रेलवे से
जुड़ी कई
जानकारियां व
नमूने रखे गए
हैं, तो फॉक
ऑर्ट
म्यूजियम में
मैसूर की लोक
कलाओं को करीब
से देखा व समझा
जा सकता है।
एशिया के बड़े
संग्रहालयों
में एक गिने
जाने वाले इस
म्यूजियम में
खिलौने,
कठपुतलियां,
सालों पुराना
घर के प्रयोग
का सामान
वगैरह सब रखे
गए
हैं।
वृन्दावन
गार्डन
कृष्णाराजा
सागर बांध के
पास बना यह बाग
मैसूर का सबसे
चर्चित
टूरिस्ट
प्लेस है। यह
र्गाडन
सूर्यास्त के
बाद शुरू होने
वाले लाइटिंग
फाउंटेन्स के
लिए पॉप्युलर
है। इस गार्डन
को शाम के समय
देखें। साथ ही,
बांध को देखना
भी न भूलें, जो
अपने आप में
इंजीनियरिंग
का एक बेहतरीन
उदाहरण
है।
चामुंडी
हिल्स
शहर
से 10 किलोमीटर
की ड्राइव पर
हैं चामुंडी
हिल्स।
समुद्र तल से 1065
मीटर की ऊंचाई
की ये
पहाड़ियां
कुदरत की
अनूठी
सुंदरता की
प्रतीक हैं।
पहाड़ी के
चोटी पर
चामुंडेश्वरी
देवी का मंदिर
बना है,
जिन्होंने
महिषासुर का
वध किया था।
कहा जाता है कि
यह मंदिर 11वीं
शताब्दी का
है। मंदिर में
जाने के लिए
आपको 1000
सीढ़ियां
चढ़नी
होंगी।
बीलिगिरी
रंगना
हिल्स
नेचर
के दीवानों के
लिए यह एक
बेहतरीन जगह
है। बी.आर.
हिल्स के नाम
से पॉप्युलर
इस पहाड़ी की
चोटी पर एक
बेहद पुराना
मंदिर है और
लोगों की
इसमें गहरी
आस्था है।
मंदिर में आप
सीढ़ियों के
अलावा, ड्राइव
करते हुए भी जा
सकते हैं।
वैसे, यहां
पर एक वाइल्ड
लाइफ
सैंक्चुरी भी
है। 550
स्क्वेयर
मीटर में बनी
इस सैंक्चुरी
में हाथी,
भालू, हिरण
जैसे तमाम
जानवर देखे जा
सकते हैं। एक
अनुमान के
मुताबिक यहां
पर पक्षियों
की 250 से ज्यादा
प्रजातियां
रहती हैं।
इनके खुले
करतबों को
देखने के लिए
आप सुबह-सुबह
सैंक्चुरी
में जाएं।
सैंक्चुरी
में रिसॉर्ट
और ठहरने की
सुविधा भी है।
चाहें, तो आप
यहां एक दिन
ठहर भी सकते
हैं।
मैसूर
की
झीलें
हालांकि
आधुनिकता के
मामले में
मैसूर कतई
पीछे नहीं है,
लेकिन इसकी
झीलों का
मनोरम माहौल
इसे आज भी
सदियों
पुराना शांत
मैसूर बनाए
रखता है। यहां
आप कारंजी लेक,
कुकरहली लेक
और लिंगबुदी
लेक देख सकते
हैं। अपनी सैर
के दौरान नर्म
हरी दूब पर
लेटकर कुदरत
को अपने जेहन
में महसूस
करना न
भूलें।
और
भी हैं
ऑप्शन
मैसूर
से आगे भी आप
मेल्कोट,
नन्जनगढ़,
सोमनाथपुर
मंदिर वगैरह
देखने जा सकते
हैं। यहां
पहुंचना बेहद
आसान है और यह
यात्रा आपको
एक ही टूर में
इस क्षेत्र के
बारे में बहुत
कुछ जानने का
मौका
देगी।
कैसे
पहुंचे
मैसूर
जाने के लिए
अगर आप प्लेन
से जाना तय
करते हैं, तो
बेंगलुरु का
एयरपोर्ट
इसके सबसे
नजदीक
पड़ेगा। यहां
से मैसूर की
दूरी 140
किलोमीटर है।
दोनों शहरों
के बीच ट्रेन
और बस सर्विस
बहुत अच्छी
है। फिर मैसूर
ट्रेन से भी
जाया जा सकता
है।
शॉपिंग
कल्चरल
शहर होने के
नाते मैसूर
में क्राफ्ट
वर्क खूब
मिलता है।
यहां से
खासतौर पर
टीकवुड, चंदन
की लकड़ी और
रोजवुड की बनी
चीजें
खरीदें। इसके
अलावा, यहां से
सिल्क की
साड़ियों व इस
फैब्रिक के
अन्य
परिधानों की
शॉपिंग करें।
मैसूर अपनी
पेंटिंग्स के
लिए भी फेमस
है। यहां से आप
ऑयल और वॉटर
बेस्ड
पेंटिंग्स
खरीद सकते
हैं।
कुजीन
मैसूर में
खाने की कोई
समस्या नहीं
होगी। साउथ के
दूसरे शहरों
की तरह ही यहां
के खाने में
चावल का खूब
प्रयोग होता
है। उपमा,
उत्तपम, डोसा
और इडली की
तमाम वैराइटी
आप यहां एंजॉय
कर सकते हैं।
मीठे में अन्य
कई चीजों के
साथ मैसूर पाक
व चिरौटी जरूर
चखें।
हैलो
डेल्ही
डेस्क