मर्द भी अकेले में आंसू बहाते हैं-रिश्ते-नाते-घर-परिवार -Navbharat Times
 
मर्द भी अकेले में आंसू बहाते हैं
12 Nov 2008, 1410 hrs IST,हेलो दिल्ली  
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यह कहना ठीक नहीं है कि मर्द को दर्द नहीं होता, क्योंकि महिलाओं की तरह पुरुषों के दिल में भी टीस उठती है और वह भी अकेले में आंसू बहाते हैं। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि महिलाएं इमोशनल पुरुषों को किस हद तक पसंद करती हैं :

अगर किसी लेडी ने बहुत ही खूबसूरत ड्रेस पहनी है, लेकिन उसके बॉयफ्रेंड का ध्यान इस ओर नहीं जाता। उस पर कॉम्प्लीमेंट्स की बरसात करने की बजाय वह बस इतना ही कहता है कि ड्रेस अच्छी लग रही है। जाहिर है लड़के के इस तरह इग्नोर करने से उस लड़की का मूड बहुत खराब हो जाएगा। ऐसे में जब वह रोने लगेगी, तो उसका बॉयफ्रेंड कहेगा कि छोटे बच्चों की तरह बर्ताव नहीं करना चाहिए, जिससे उसका दिमाग और भी खराब होगा।

अब इसी हालात को जरा उलटकर देखें। अगर कोई लड़का किसी ड्रेस में बेहद स्मार्ट लग रहा है और उसकी गर्लफ्रेंड उसे नज़रअंदाज कर देती है, तो उसे बुरा तो लगता है लेकिन वह इस बात को अपने मन में ही दबाकर खून के घूंट पीकर रह जाता है।

लेकिन लाख टके का सवाल तो यह है कि क्या महिलाएं इमोशनल पुरुषों को पसंद करती हैं। बेशक इस मामले में हर महिला की अपनी राय है। वीजे अनुष्का दांडेकर कहती हैं, 'मैं उन लड़कों के साथ दोस्ती नहीं कर सकती, जो ओवर सेंसेटिव होते हैं। मेरा मानना है कि पुरुषों को तन और मन दोनों से मजबूत होना चाहिए। मैं जरूरत से ज्यादा इमोशनल पुरुषों को पसंद नहीं करती।'

एचआर कंसलटेंट चारु कालरा का कहना है, 'मेरा एक्स-बॉयफ्रेंड अक्सर मुझे लेटर देता रहता था, जिसमें एक साथ बिताए हुए हमारे कुछ सुनहरे पलों का जिक्र होता है। लेकिन जब कभी मैं अपने फ्रेंड के साथ बैठी रहती थी, तब भी वह अक्सर आकर मुझे कार्ड या लेटर थमा जाता था। लेकिन उनकी ऐसी हरकतों से मुझे कोफ्त होने लगी। कुछ बातें प्राइवेट होती हैं। वह उन बातों को सिर्फ अपने तक ही हीं रख सकता था क्या। अब हम दोनों एक छत के नीचे नहीं रहते। इससे आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि उसने मुझे कितना परेशान किया होगा?'

टीवी ऐक्ट्रिस पूजा मिश्रा कहती हैं, 'पुरुषों को कभी जरूरत से ज्यादा अपनी भावनाओं का प्रदर्शन नहीं चाहिए। लेडीज भावनाओं की कद्र करना तो जानती हैं, पर पार्टनर या बॉयफ्रेंड का जरूरत से ज्यादा भावुक होना उन्हें परेशानी में डाल देता है।' अगर कोई पुरुष किसी महिला के सामने भावुक अंदाज में अपने विचारों को रखता है, तो महिलाओं को उसे स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होती, लेकिन अगर यह जरूरत से ज्यादा ओवर रिएक्ट करता है, तो इसका असर उलटा भी हो सकता है। मनोवैज्ञानिक संदीप वोहरा कहते हैं, 'जरूरत से ज्यादा भावुक होना किसी भी हाल में ठीक नहीं कहा जाएगा। इसलिए बहुत जरूरी नहीं होने पर लड़कों को अपोजिट सेक्स के सामने अपनी भावुकता का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

कल्पना शर्मा
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