कॉमन
एडमिशन टेस्ट
यानी कैट में
अब सिर्फ पांच
दिन बाकी रह गए
हैं।
मैनिजमंट
जिनका सपना है,
वे इसे पूरा
करने के लिए
पूरी तरह
तैयार हो चुके
होंगे। फिर भी,
अंतिम दिनों
की तैयारी को
अनदेखा नहीं
किया जा
सकता।
कैट
की परीक्षा
किसी युद्घ से
कम नहीं होती,
इसलिए कारगर
रणनीति बनाना
बेहद जरूरी
है। कैट से
पहले की जाने
वाली अंतिम
तैयारी ऐसी
होनी चाहिए कि
परीक्षा वाले
दिन तक आपके
अंदर भरपूर
आत्मविश्वास
आ चुका हो। कई
स्टूडेंट्स
यह सोचकर पहले
ही हार मान
लेते हैं कि कम
समय रह जाने की
वजह से कुछ
नहीं किया जा
सकता। उन्हें
ध्यान रखना
चाहिए, 'मन के
हारे हार है,
मन के जीते
जीत'।
आत्मविश्वास
बनाए
रखें
कैट
परीक्षा का
स्वरूप
क्रिकेट मैच
की तरह होता
है। मैच में
टीम की
परफॉर्मेन्स
विकेट की
स्थिति पर
निर्भर करती
है। इसी तरह,
कैट कैंडिडेट
की
परफॉर्मेन्स
टेस्ट पेपर के
डिजाइन पर
काफी हद तक
डिपेंड करती
है। कोई
कोचिंग सेंटर
या टीचर कैट की
असली परीक्षा
की हूबहू
तैयारी नहीं
करा सकता,
इसलिए किसी
तरह की कोचिंग
पर आंख मूंदकर
विश्वास नहीं
करना चाहिए।
विश्वास खुद
पर रखिए,
क्योंकि
आत्मविश्वास
से बड़े से
बड़े युद्घ भी
जीते जा सकते
हैं।
आत्मविश्वास
और
अतिआत्मविश्वास
में अंतर भी
रखें। 'मुझे सब
कुछ आता है'
जैसी सोच
विफलता का
कारण बन सकती
है।
सरप्राइज
की कमी
नहीं
यह
नहीं सोचना
चाहिए कि कैट
में चीजें
रिपीट नहीं
होंगी।
अनुभवों के
आधार पर कहा जा
सकता है कि कैट
सरप्राइज से
भरपूर
एग्ज़ाम है।
इसके बावजूद
कैट का सही
अनुमान लगाया
जा सकता है,
बशर्ते
तैयारी को
सिर्फ पिछले
दो-तीन सालों
में ही नहीं
समेट दिया
जाए। कैट की
तैयारी में
सबसे कमजोर
कड़ी यह सोच
होती है कि कोई
चीज जल्दी
रिपीट नहीं
होगी, लेकिन
गारंटी नहीं
दी जा सकती कि
किस साल का कैट
पैटर्न किस
साल दोहराया
जाएगा। साल 2006
की कैट
परीक्षा में
शामिल
फैक्ट्स
इनफेरेंस और
जजमेंट्स
क्वेश्चन
टाइप इससे
पहले कैट-1991 में
पूछा गया
था।
बिना
तैयारी किए
युद्घ में हार
का सामना बहुत
जल्दी करना
पड़ता है,
इसलिए पिछले 10-15
सालों के
क्वेश्चन
टाइप के आधार
पर तैयारी
करें। आप
पाएंगे कि हर
पांच-सात या दस
सालों में
क्वेश्चन
टाइप और
लॉजिक्स
रिपीट हुए
हैं। इसके
अलावा,
एग्ज़ाम में
क्वेश्चंस और
सेक्शंस की
संख्या का
पहले ही
अनुमान नहीं
लगाना चाहिए।
इसका उदाहरण
भी मौजूद है,
कैट-1999 में पहली
बार क्वेश्चन
पेपर में तीन
सेक्शंस आए
थे। हर सेक्शन
में 55
क्वेश्चंस
थे। इससे पहले
दो-तीन सालों
से लगातार दो
सेक्शंस दिए
जा रहे थे।
स्टूडेंट्स
के दिमाग में
फिट था कि वे
हर सेक्शन को
एक-एक घंटा
देंगे और दो
घंटे में पेपर
आसानी से पूरा
हो जाएगा।
अचानक तीन
सेक्शन देखकर
उनका सारा
खाका गड़बड़ा
गया और
ज्यादातर तीन
सेक्शंस को 40-40
मिनट के
टाइमफ्रेम
में नहीं बांट
सके।
उन्होंने
पहला सेक्शन
पहले से ही तय
एक घंटे में
पूरा किया,
जिससे बाकी
सेक्शंस के
लिए रह गए
सिर्फ 80 मिनट,
यानी तीसरे
सेक्शन के 55
क्वेश्चंस हल
करने के लिए
सिर्फ 20 मिनट।
इसका
नुकसान यह हुआ
कि ज्यादातर
स्टूडेंट्स
बेहद आसान
अंतिम 25
सवालों तक
पहुंच ही नहीं
सके। ऐसे में
खुद को किसी भी
सरप्राइज के
लिए तैयार
रखते हुए
एग्ज़ाम रूम
में जाएं।
क्वेश्चन
पेपर में 50
सवाल भी हो
सकते हैं और 150
भी। एक सेक्शन
भी हो सकता है
और तीन या चार
भी। आप इनमें
से किसी के लिए
भी तैयार
होंगे, तो कोई
सरप्राइज
आपकी
परफॉर्मेन्स
पर असर नहीं
डाल
सकेगा।
पूर्वानुमान
से
बचें
कुछ
छात्र
मार्केट में
उपलब्ध
अनुमानित कैट
सीरीज़ को हल
करके अपना
आकलन करते
हैं। ऐसा
अक्सर होता है
कि एक सीरीज़
में उन्हें 80
पर्सेन्ट
मार्क्स
मिलते हैं, तो
दूसरी में
सिर्फ 50
प्रतिशत। ऐसे
में वे अपनी
तैयारी का सही
अनुमान नहीं
लगा पाते। इन
सीरीज़ के
आधार पर किसी
निष्कर्ष पर
पहुंचने से
बचना चाहिए,
अन्यथा उनके
दिमाग में
अपने अंकों को
लेकर पहले से
ही एक सीमा
रेखा खिंच
जाएगी।
नॉलिज
का पूरा
उपयोग
अगर
आप 99 पर्सेन्ट
मार्क्स
हासिल कर सकते
हैं और सिर्फ 80
पर्सेन्ट ला
पाते हैं, तो
इसके लिए आप ही
कसूरवार
होंगे। किसी
मायूसी से
बचने के लिए
कैट में अपनी
नॉलिज और
तैयारी का
पूरा उपयोग
करें। तभी
उम्मीद से भी
ज्यादा
मार्क्स पा
सकेंगे।
अंतिम चार
दिनों को पूरी
तरह रिविजन के
नाम कर दीजिए।
आपने जो कुछ
पढ़ा है, उसे
अच्छी तरह
तैयार कर
लीजिए। अब कुछ
भी नया करने से
बचें। इससे आप
अपनी तैयारी
को लेकर और
कन्फ्यूज हो
सकते हैं और
इसका असर आपके
आत्मविश्वास
पर भी पड़ सकता
है। रिविजन के
लिए भी थ्योरी
या चैप्टर्स
पर ध्यान देने
की बजाय
क्वेश्चन को
रिवाइज करने
से ज्यादा लाभ
होगा।
जिनका
पहला नहीं है
चांस
पिछले
साल कैट में
शामिल
कैंडिडेट्स
में से 65 फीसदी
ऐसे थे, जो दो
से अधिक बार
इसका सामना कर
चुके थे। इस
बार भी कई
स्टूडेंट्स
के लिए यह
पुराना अनुभव
होगा, लेकिन
सही रणनीति की
जरूरत उन्हें
भी पडे़गी।
पिछले सालों
पर गौर करें,
तो एक बड़ा
बदलाव और
दिखाई देता
है। छात्र अब
बी-स्कूल में
पढ़ने के लिए
आईआईएम को ही
पहली पसंद बना
रहे हैं। इसी
चाहत में वे
पहली बार में
सफल नहीं होने
पर बार-बार कैट
में शामिल
होने से नहीं
हिचकते।
ऐसे
स्टूडेंट्स
के लिए जरूरी
है कि वे कैट
में सफल न होने
की छाया से
बाहर निकल
आएं। उन्हें
पहले की
तैयारी का
फायदा इस बार
की परीक्षा
में उठाना
चाहिए। सही
योजना के
अनुसार
परीक्षा में
शामिल हों।
परिणाम के
विषय में अधिक
न सोचें।
दरअसल, अधिक
उम्मीद रखने
से दबाव बढ़
जाता है और हम
प्रश्न हल
करते समय गलती
कर बैठते
हैं।
एग्ज़ाम
की
रणनीति
बाकी
बचे दिनों के
लिए आप एक
अच्छी
स्ट्रेटजी
तैयार कर लें,
जिससे
परीक्षा भवन
में सही ढंग से
प्रश्न हल हो
सके। अपने मॉक
टेस्ट के
परिणामों को
देखें और अगर
किसी सेक्शन
में
थोड़ी-बहुत
कसर बाकी रह गई
है, तो उस पर
जरूर ध्यान
दें। इतना ही
नहीं, आपकी
कोशिश यह होनी
चाहिए कि आपके
पास 10 से 15 मिनट
का बफर टाइम भी
हो। इस टाइम का
उपयोग अपने
जवाबों पर
निगाह डालने
में
करें।
एनबीटी
एजुकेशन
डेस्क