चेन्नै:
डॉ. आंबेडकर
लॉ कॉलिज में
बुधवार को
छात्रों के
बीच हुई हिंसा
के मामले में
एक एसीपी और एक
इंस्पेक्टर
को सस्पेंड कर
दिया गया है,
जब कि 3 अन्य
पुलिसकर्मियों
का शहर से
ट्रांसफर कर
दिया गया है।
इन लोगों पर यह
कार्रवाई
हिंसा रोकने
में नाकाम
रहने पर की गई
है। छात्रों
के 2 गुटों के
बीच यह संघर्ष
एक पोस्टर पर
डॉ. आंबेडकर का
नाम न छपा होने
को लेकर पैदा
हुआ था। इस
मामले में
जहां 7 छात्रों
को गिरफ्तार
किया गया है,
वहीं कॉलिज के
प्रिंसिपल को
भी सस्पेंड कर
दिया गया है।
सरकार ने
मामले की जांच
के लिए आयोग
गठित करने की
घोषणा की है।
गौरतलब है
कि इस संघर्ष
में 3 छात्र
बुरी तरह से
घायल हो गए थे।
चेन्नै के
पुलिस
कमिश्नर आर.
शेखर ने बताया
कि घटना के बाद
एसीपी
नारायणमूर्ति
और
इंस्पेक्टर
शेखर बाबू को
सस्पेंड कर
दिया गया है और
4 सब
इंस्पेक्टरों
का चेन्नै से
कहीं और
तबादला कर
दिया गया है।
गिरफ्तार
छात्रों को
पुलिस हिरासत
में भेज दिया
गया है। इन पर
हत्या की
कोशिश का
मामला भी दर्ज
किया गया है।
इस बीच,
पुलिस
गुरुवार सुबह
एक बस जलाए
जाने की घटना
में लिप्त पाए
जाने के संदेह
में कुछ लोगों
से पूछताछ कर
रही है।
हालांकि,
पुलिस बस जलाए
जाने की घटना
को लॉ कॉलिज
में घटी घटना
से जोड़कर
नहीं देख रही
है। उन्होंने
कहा कि
अंबेडकर की
मूर्ति
स्थापित करने
की मांग को
लेकर बस को
जलाया गया है।
पुलिस
सूत्रों ने
बताया कि लॉ
कॉलिज परिसर
के अंदर हुई
हिंसा जातीय
मामला है।
कानून
मंत्री
दुरईमुरुगन
ने कहा कि
कॉलिज के
प्रिंसिपल
श्रीदेव को
सस्पेंड कर
दिया गया है,
जब कि
सेमेस्टर
परीक्षाओं की
तारीख भी आगे
खिसका दी गई
है। किसी
अप्रिय घटना
की आशंका के
चलते गुरुवार
को तमिलनाडु
के सभी लॉ
कॉलिज बंद
रहे। इस मसले
की गूंज
विधानसभा में
भी सुनाई दी।
ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव का
जवाब देते हुए
कानून मंत्री
ने मामले की
जांच के लिए
आयोग गठित
करने का ऐलान
किया।